नरेन्द्र मोदी ने यूं तोड़ा था अमेरिका का घमंड, कभी टंगा था ‘NO ENTRY’ का बोर्ड

अमेरिका को अपनी ताकत का घमंड है और वह दुनिया के कई मुल्कों पर मनमाने फैसले थोपता रहा है। 2005 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नरेन्द्र मोदी के अमेरिका आने पर रोक लगा दी थी। नरेन्द्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। अमेरिका ने उन्हें वीजा देने से इंकार कर दिया था।

नरेन्द्र मोदी ने यूं तोड़ा था अमेरिका का घमंड

नई दिल्ली। अमेरिका को अपनी ताकत का घमंड है और वह दुनिया के कई मुल्कों पर मनमाने फैसले थोपता रहा है। 2005 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नरेन्द्र मोदी के अमेरिका आने पर रोक लगा दी थी। नरेन्द्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। अमेरिका ने उन्हें वीजा देने से इंकार कर दिया था। नरेन्द्र मोदी ने वक्त का इंतजार किया। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तो अमेरिका ने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए न केवल उन्हें बधाई दी बल्कि अपने देश में आने का न्योता भी दे दिया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका का घमंड चूर-चूर कर दिया था। जिस अमेरिका ने नरेन्द्र मोदी की एट्री बैन कर दी थी उसी ने उन्हें अपने देश की संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया। यह भारत की मजबूत विदेश नीति की जीत थी। ये नरेन्द्र मोदी का ही कमाल है कि डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार में अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा लगा था। ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के समय भारत और भारतवंशियों की दिल खोल कर तारीफ की थी।

मोदी पर लगा था बैन

मोदी पर लगा था बैन

2002 के गुजरात दंगे के बाद अमेरिका ने नरेन्द्र मोदी को निषिद्ध व्यक्ति की श्रेणी में डाल दिया था। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश थे। बुश ने अमेरिका में मोदी की एंट्री बैन कर दी थी। नरेन्द्र मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे। वे राज्य में पूंजीनिवेश बढ़ाने के लिए अमेरिका की यात्रा करना चाहते थे। लेकिन बुश प्रशासन ने उन्हें वीजा देने से इंकार दिया। 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआइटी ने नरेन्द्र मोदी को सबूतों के अभाव में दंगा के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। 2014 में नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री चुने गये। 29 साल बाद पहली बार किसी एक दल (भाजपा) को पूर्ण बहुमत मिला था। मोदी के नेतृत्व में मजबूत और स्थायी सरकार बनी थी। उभरते भारत की उपेक्षा करना अमेरिका के लिए संभव नहीं रह गय़ा था। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नरेन्द्र मोदी को बधाई दी। बुश की गलती को ओबामा ने सुधारा। जुलाई 2014 में ही ओबामा ने अपने उप विदेश मंत्री विलियम बर्न को भारत भेज कर नरेन्द्र मोदी को अमेरिका आने के लिए न्योता दिया। नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका जैसे देश को झुकने पर मजबूर कर दिया था। अमेरिकी को न्योता देने के लिए एक दूत भेजना पड़ा। सितम्बर 2014 में मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अमेरिका गये।

अमेरिकी संसद में मोदी का भाषण

अमेरिकी संसद में मोदी का भाषण

बराक ओबामा अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में थे। उन्होंने अप्रैल 2016 में नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया। जून में मोदी का अमेरिका जाना तय हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के तत्कालीन स्पीकर पॉल रायन ने कहा था, दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतंत्र के प्रधानमंत्री को सुनना उनके देश के लिए एक नया अनुभव होगा। 8 जून 2016 को जब नरेन्द्र मोदी अमेरिकी संसद में पहुंचे तो कई मिनट तक तालियां बजती रहीं थी। जिस व्यक्ति की कभी अमेरिका में एंट्री बैन थी उसको उस देश की संसद में सम्मानित किया जा रहा था। मोदी के 45 मिट के भाषण में 40 से अधिक बार तालियां बजीं। मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठा कर पाकिस्तान पर जोरदार हमला किया। उन्होंने अमेरिका को अतीत की बाधाओं से बाहर निकल कर नये संबंध बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल भारत या अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इसलिए इसके खिलाफ सबको मिल कर कार्रवाई करनी होगी।

जब मोदी की तर्ज पर ट्रंप के लिए लगा नारा

जब मोदी की तर्ज पर ट्रंप के लिए लगा नारा

नरेन्द्र मोदी ने अपनी मजबूत विदेश नीति से दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया। इसका ही असर था कि जब 2016 में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने वोट के लिए मोदी की तर्ज पर नारा गढ़ा था। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के रूप में ट्रंप सितम्बर 2016 में चुनाव प्रचार के लिए न्यूजर्सी गये हुए थे। वहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के बीच कहा था, अबकी बार ट्रंप सरकार। ये नारा नरेन्द्र मोदी के नारे से प्रेरित था जो 2014 में गढ़ा गया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र के लिए नारा गढ़ा गया था- अबकी बार मोदी सरकार। 2016 में भारतीय वोटरों को लुभाने के लिए ट्रंप के चुनावी रणनीतिकारों ने इस नारे का वीडियो बना कर पूरे देश में इस्तेमाल किया था। अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही ट्रंप ने कहा था कि वे भारत समर्थक हैं। लेकिन ट्रंप स्थिर चित्त वाले नेता नहीं माने जाते। भारत-अमेरिकी संबंध, पाकिस्तान की कसौटी पर अभी भी खरा नहीं उतरा है। ट्रंप भारत और मोदी की तारीफ तो करते हैं लेकिन कश्मीर, पाकिस्तान और आतंवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाते रहे हैं।

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