दाभोलकर, गौरी लंकेश की हत्या में इस्तेमाल बंदूकों को नष्ट करने में सनातन संस्था के वकील ने की मदद: CBI
नई दिल्ली। पुणे की विशेष सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में गिरफ्तार सनातन संस्था के वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहयोगी विक्रम भावे को अगले महीने की एक तीरीख तक के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है। सीबीआई ने बताया कि भावे, पुनालेकर के कार्यालय में सहायक के रूप में कार्यरत था। अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह सुबह की सैर पर निकले थे।

प्रारंभिक जांच में ये बात सामने आई है कि पुनालेकर और भावे का दाभोलकर के दो कथित हत्यारों से संपर्क था और उन्होंने सबूतों को मिटाने में भी मदद की। सीबीआई ने रविवार को अदालत को बताया कि पुनालेकर ने मामले में गिरफ्तार किए गए शूटर शरद कालस्कर से कथित तौर पर उन हथियारों को नष्ट करने को कहा था जिनका इस्तेमाल दाभोलकर और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में किया गया था। एजेंसी ने यह भी कहा कि भावे ने कथित तौर पर शूटरों की मदद की और उस जगह का मुआयना किया जहां दाभोलकर को गोली मारी गई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि भावे कथित शूटरों शरद कालस्कर और सचिन अंदुरे की मदद की थी और अपराध के बाद उन्हें भागने में मदद की थी।
आपको बता दें कि पुनालेकर सनातन संस्था के सबसे मजबूत चेहरों में से एक रहे हैं और एक संगठन का बचाव करने के लिए टीवी डिबेट में दिखाई देते रहे हैं। सनातन संस्था के सदस्य विक्रम भावे पर इससे पहले 2008 में ठाणे ब्लास्ट मामले में आरोपपत्र दायर किया गया था। इस मामले में 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था। सीबीआई के मुताबिक, नरेंद्र दाभोलकर की हत्या आतंक की पूर्व नियोजित कार्रवाई थी।












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