नारा लोकेश ने फिर से शुरू की युवा गालम पदयात्रा, जानिए TDP का कितना लाभ
टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के बेटे और पूर्व आईटी मंत्री नारा लोकेश ने युवा गलाम पदयात्रा फिर से शुरू की है। पद यात्रा की शुरुआत के मौके पर इस टीडीपी महासचिव नारा लोकेश ने आंध्र प्रदेश की वाईएस जगन सरकार पर कई आरोप लगाए।
दरअसल, टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने एन चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के बाद युवा गालम पदयात्रा रोक दी गई थी। यात्रा के दौरान नारा लोकेश ने आंध्र प्रदेश के लोगों को तेलगु देशम पार्टी के विचारधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
यात्रा का लक्ष्य
युवा गालम पदयात्रा का लक्ष्य 400 दिनों में 4,000 किमी की दूरी तय करना था। अब तक, इसने 210 दिनों में 2,852 किमी की यात्रा पूरी कर ली है। ये पदयात्रा 27 जनवरी को शुरू की गई थी। लेकिन 9 सितंबर को नारा लोकेश के पिता व टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद उन्होंने युवा गालम स्थगित करते हुए नायडू के मामले की पैरवी। वहीं अब एनसी नायडू को जमानत मिलने के बाद फिर से नारा लोकेश ने यात्रा शुरू कर दी है।

वहीं जब टीडीपी से ये पूछा गया कि नारा लोकेश ने अपनी पदयात्रा क्यों जारी नहीं रखी। तो टीडीपी के राजनीतिक सचिव ने कहा कि टीडीप चीफ पर लगाए गए मामले एक या फिर दो नहीं हैं। चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ छह मामले दर्ज हैं। आईआरआर मामले में नारा लोकेश का नाम भी ए14 के रूप में शामिल किया गया था। ऐसे में ये टीडीपी के खिलाफ एक साजिशी थी, जिसे नारा लोकेश ने नाकाम साबित कर दिया।
2019 के विधानसभा चुनावों में टीडीपी के हारने, 175 में से केवल 23 सीटें जीतने और लोकेश मंगलागिरी से अपने पहले चुनाव में जीतने में असफल रहने के कारण, कैडर के बीच संदेह पैदा हो गया। इससे भी बुरी बात यह थी कि मंगलगिरि की सीमा अमरावती से लगती थी, जिसे टीडीपी ने राज्य की प्रतिष्ठित राजधानी में बदलने की योजना बनाई थी।
नायडू की गिरफ्तारी के बाद टीडीपी का प्रबंधन ज्यादातर कानूनी मुद्दों और दिल्ली की बैठकों तक ही सीमित रहा। वहीं अब नारा लोकेश पदयात्रा को आगे बढ़ने के साथ टीडीपी अब जनता के बीच सहानुभूति की भी उम्मीद कर रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबि जब चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार किया गया, तो पार्टी बहुत तनाव में थी। तेलंगाना विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही थी और भाजपा गठबंधन को लेकर दुविधा में थी। लेकिन एनसी नायडू को जमानत मिलने के बाद पार्टी एक बार फिर से अपने अभियान पर आगे बढ़ रही है।












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