नागालैंड फायरिंग: घटना में शामिल जवानों के बयान लेगी SIT, सेना ने दी इजाजत
कोहिमा, 29 दिसबंर: नागालैंड के मोन जिले में 4 दिसंबर को सेना की गोलीबारी में 14 नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद हुई हिंसा में एक जवान भी शहीद हुआ। इस घटना के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जो अब इस घटना में शामिल जवानों के बयान दर्ज करेगी। इसके लिए भारतीय सेना ने भी हामी भर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि एसआईटी इस हफ्ते सभी जवानों से बात कर लेगी।

नागालैंड पुलिस के सूत्रों के मुताबिक सेना ने एसआईटी को जवानों से बात करने की इजाजत दे दी है, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वो पूछताछ करेंगे या सिर्फ उनका बयान दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी में अधिकारियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है। इस टीम में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पांच अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा जांच दल को 7 टीमों में बांटा गया है, ताकि जल्द से जल्द रिपोर्ट दी जा सके।
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हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि राज्य स्तरीय जांच टीम कैसे आगे बढ़ेगी, क्योंकि नागालैंड में सशस्त्र बल (विशेष) अधिकार अधिनियम यानी अफस्पा लागू है। इसके तहत राज्य स्तरीय अधिकारी केंद्र की मंजूरी के बिना जवानों से पूछताछ आदि नहीं कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने भी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए थे, जिसकी एक अलग टीम पहले से ही नागालैंड में मौजूद है।
कैसे हुई घटना?
मोन जिला उग्रवाद से प्रभावित है। सेना को खबर मिली थी कि वहां पर उग्रवादियों का दल आने वाला है। इस पर 21 पैरा फोर्स के कमांडोज ने जाल बिछाया। इसी दौरान एक गाड़ी वहां से गुजरी। जब जवानों ने उन्हें रुकने का इशारा किया, तो गाड़ी की रफ्तार बढ़ गई। ऐसे में जवानों ने उन्हें उग्रवादी समझ फायरिंग कर दी। बाद में वो कोयला मजदूर निकले।












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