पुलिस के निलंबित जवान ने सुप्रीम कोर्ट का ऑफर ठुकराया, बिना दाढ़ी काम करने से इनकार

बेदादे ने साल 2012 में ही बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दी थी, जिसमें उनके खिलाफ फैसला आया था। उनका कहना है कि एक नागरिक अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र है।

नई दिल्ली। दाढी़ रखने के लिए अडिग महाराष्ट्र स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स (SRPF) में कार्यरत जहीरुद्दीन शम्सुद्दीन बेदादे ने सुप्रीम कोर्ट का ऑफर ठुकराते हुए नौकरी पर दोबारा आने से मना कर दिया है।

बेदादे SRPF से बीते पांच साल से सस्पेंड हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बेदादे को सहानुभूति के आधार पर फिर से नौकरी पर आने के लिए कहा था। कोर्ट में बेदादे के वकील मोहम्मद इरशाद हनीफ ने कहा कि इस्लाम में अस्थाई दाढ़ी रखने की बात नहीं कही गई है।

खेहर ने कहा- हम बुरा महसूस कर रहे हैं

खेहर ने कहा- हम बुरा महसूस कर रहे हैं

कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बेदादे के वकील से कहा कि हम आप के लिए बुरा महसूस कर रहे हैं। आपको नौकरी से बाहर नहीं होना चाहिए। अगर आप चाहें तो हम आपको ज्वाइन कराने के लिए कुछ कर सकते हैं, अगर आप यह मानें की कुछ धार्मिक अवसरों के अलावा आप दाढ़ी नहीं रखेंगे। यह आपकी इच्छा है।

याचिका में बेदादे ने कहा है

याचिका में बेदादे ने कहा है

इस पर बेदादे के वकील ने कहा कि कॉन्सटेबल, बिना दाढ़ी के वो ठीक नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि फिर हम आपकी मदद नहीं कर सकते। इस दौरान बेदादे के वकील हनीफ ने कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया हालांकि इसे ठुकरा दिया गया।

बेदादे ने अपनी याचिका में कहा है एक नागरिक अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र है और उसमें रिजर्व पुलिस बल के कमांडेंट हस्तक्षेप नहीं कर सकते या मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते।

बेदादे को दी गई थी इजाजत

बेदादे को दी गई थी इजाजत

गौरतलब है कि बेदादे को फोर्स में आने के बाद छंटी हुई और साफ दाढ़ी रखने की शर्त पर इजाजत दी गई थी, लेकिन बाद में कमांडेंट ने इस अनुमति को वापस लेकर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु कर दी। 12 दिसबंर 2012 को बेदादे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी फैसला दिया। अदालत की ओर से कहा गया था फोर्स एक धर्मनिरपेक्ष एजेंसी है, ऐसे में अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि दाढ़ी रखना मौलिक अधिकार नहीं है, क्योंकि यह इस्लाम के उसूलों में शामिल नहीं है।

वकील ने दी थी दलील

वकील ने दी थी दलील

हाईकोर्ट से फैसला अपने खिलाफ आने के बाद बेदादे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जनवरी 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बेदादे के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और तब से मामला सुनाई के लिए अटका पड़ा है। साल 2013 की सुनवाई में बेदादे के वकील ने 1989 में सैन्य बलों से जुड़े एक सर्कुलर के जरिए कहा था कि नियमों में दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई है। साथ ही इस्लाम के हदीस का जिक्र करते हुए दलील दी थी कि दाढ़ी पैगंबर मोहम्मद की ओर से बताई गई जीवन शैली का मामला है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+