'जल रहा मुर्शिदाबाद लेकिन गायब Yusuf Pathan', सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे सवाल, TMC में भी दिखी नाराजगी
Yusuf Pathan News: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद भड़की हिंसा ने जिले के कई हिस्सों को प्रभावित किया है। हिंसा के चलते सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं और तीन लोगों की जान चली गई है। इस बीच, बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की चुप्पी और क्षेत्र में उनकी अनुपस्थिति पर न सिर्फ विपक्ष बल्कि पार्टी के भीतर से भी सवाल उठने लगे हैं।
हिंसा मुख्य रूप से जंगीपुर निर्वाचन क्षेत्र के सुती, समसेरगंज और धुलियान इलाकों में फैली, लेकिन बहरामपुर, जो यूसुफ पठान का निर्वाचन क्षेत्र है वो घटनास्थल से बहुत दूर नहीं है। ऐसे में संकट की घड़ी में यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) गैरमौजूदगी ने असंतोष को जन्म दिया है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग उनसे सवाल भी पूछ रहे है।

पार्टी नेताओं की प्रतिक्रिया
मुर्शिदाबाद के टीएमसी सांसद अबू ताहिर खान ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, 'यूसुफ पठान की अनुपस्थिति गलत संदेश देती है। वह बाहरी हैं और राजनीति में नए हैं, लेकिन यह समय लोगों के साथ खड़े होने का है। कोई यह नहीं कह सकता कि यह मेरा क्षेत्र नहीं है।'
भरतपुर से टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने भी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, 'उन्होंने लोगों के वोट से चुनाव जीता, लेकिन अब लोगों के साथ नहीं खड़े हैं। अगर यही रवैया रहा, तो मैं नेतृत्व से अपील करूंगा कि उन्हें अगली बार टिकट न दिया जाए।'
सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद
इस बीच यूसुफ पठान की एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें वे चाय की चुस्की लेते नज़र आ रहे हैं, ने और भी विवाद खड़ा कर दिया। पोस्ट में लिखा था, 'आरामदायक दोपहर, अच्छी चाय और शांत वातावरण। बस पल का आनंद ले रहा हूँ।' यह पोस्ट उस दिन के अगले ही दिन आई जब मुर्शिदाबाद में हिंसा भड़की थी।
इसके बाद पठान ने अपने बेटे के जन्मदिन और बंगाली नववर्ष की बधाई से जुड़ी पोस्ट तो कीं, लेकिन हिंसा या राहत कार्यों को लेकर कोई टिप्पणी अब तक नहीं की है। बताया जा रहा है कि रमज़ान के दौरान वे क्षेत्र में इफ्तार पार्टियों में शामिल हुए थे, लेकिन उसके बाद से वे इलाके में दिखाई नहीं दिए।
न्यायिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक कार्रवाई
हिंसा की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने प्रभावितों के पुनर्वास के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस शुक्रवार को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेंगे। अब तक इस मामले में 270 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
राजनीतिक संदेश और ज़मीनी हकीकत
टीएमसी के भीतर उठ रही नाराज़गी इस ओर संकेत करती है कि संकट के समय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय उपस्थिति न केवल अपेक्षित होती है, बल्कि आवश्यक भी है। यूसुफ पठान को लेकर बढ़ती असंतोष की आवाज़ें उनके राजनीतिक भविष्य पर असर डाल सकती हैं, खासकर तब जब जनता और पार्टी दोनों ही उनसे अधिक भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं।
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