आलोक नाथ मामले में कोर्ट ने कहा, 'अपने फायदे के लिए विंता ने समय रहते नहीं की शिकायत'
नई दिल्ली। कुछ समय पहले मीटू कैंपेन के तहत लेखिका विंता नंदा ने एक्टर आलोक नाथ पर रेप का आरोप लगया था। 19 साल पहले के इस मामले को लेकर विंता के आरोपों पर सुनवाई के दौरान मुंबई की सेशन कोर्ट ने आलोक नाथ को अग्रिम जमानत दी है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि विंता ने घटना के 19 साल बाद मामला दर्ज कराया है। ऐसे में आशंका है कि विंता ने अपने फायदे को ध्यान में रखते हुए घटना के तुरंत बाद ऐसा नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आलोक नाथ के निर्दोष होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने ये भी कहा कि विंता नंदा के अनुसार घटना उनके घर पर हुई थी। ऐसे में उनके द्वारा सबूत मिटाए जाने की संभावना है। विंता का कहना है कि उन्होंने इसलिए पहले शिकायत नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि आलोक बड़े स्टार है और कोई उनकी बात पर यकीन नहीं करेगा।
सेशन कोर्ट ने कहा कि आलोक नाथ द्वारा विंता को धमकाए जाने का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है जिसके डर से विंता ने कंप्लेन न लिखाई हो। कोर्ट ने आलोक नाथ के वकील की बहस को ध्यान में रखते हुए कहा कि विंता द्वारा लगाए गए आरोप अपने आप में विरोधाभासी हैं।
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