बांग्लादेश टेंशन के बीच भारत में शुरू हुआ वायु सेना का तरंग शक्ति-2024 युद्धाभ्यास, जानें क्यों है अहम?
Tarang Shakti 2024: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट होने के बाद चल रही टेंशन के बीच भारत की वायु सेना ने शनिवार (10 अगस्त) को वायु युद्धभ्यास तरंग शक्ति 2024 शुरू कर दिया है। तमिलनाडु के सूलूर में शुरू हुआ ये विश्व स्तर का हवाई युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2024 आइए जानते हैं क्यों अहम है?
बता दें तरंग शक्ति 2024 युद्धाभ्यास दो चरणों में होगा। आज से शुरू हुआ एयर एक्सरसाइज का पहला फेज 14 अगस्त तक चलेगा। जिसमें भारत समेत दुनिया की दस शक्तिशाली वायुसेना हिस्सा ले रही हैं।

तरंग शक्ति 2024 में भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों जैसे तेजस, राफेल, मिराज, जगुआर और मिग 29 इसमें उड़ान भर कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया जा रहा है।
खास बात ये है कि जिन 10 देशों की शक्ति शाली वायु सेनाएं इस तरंग शक्ति में हिस्सा ले रहे हैं उनमें पहली बार जर्मनी की वायुसेना भारतीय वायुसेना के साथ इनमें शामिल हो रही है।
हालांकि जो दस देश इसमें हिस्सा लेने वाले हैं उस लिस्ट में बांग्लादेश भी शामिल है लेकिन हाल ही में हुए तख्तापलट के कारण बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
तरंग शक्ति 2024 क्यों है अहम?
तरंग शक्ति 2024 भारत की उन्नत सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए वैश्विक रक्षा संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगा। तरंग शक्ति का उद्देश्य साझा ट्रेनिंग और परिचालन रणनीतियों (operational strategies) के जरिए अंतर्राष्ट्रीय सेना बलों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा देकर इन अनुभवों का लाभ उठाना है। तरंग शक्ति का मुख्य लक्ष्य भाग लेने वाले देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना है, साथ ही भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करना है।
दूसरे चरण में इन देशों की सेनाएं लेगी हिस्सा
एयर एक्सरसाइज का पहला चरण तमिलनाडु में 14 अगस्त तक चलेगा। वहीं दूसरा चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में छह देश भाग लेंगे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ग्रीस, सिंगापुर, यूएई और अमेरिका शामिल है।
सेनाओं को दिए जाएंगे अलग-अलग टॉरगेट
हवाई अभ्यास में हवाई युद्ध अभ्यास और ग्राउंड अभ्यास दोनों शामिल हैं। सभी भाग लेने वाले देशों के पायलट, इंजीनियर और ग्राउंड स्टाफ़ अपनी विशेषज्ञता और युद्ध के तरीकों को साझा करने वाले हैं। इसके पहले मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें दस देशों की वायु सेनाओं को अलग-अलग टॉरगेट दिए जाएंगे। ग्राउंड स्टाफ़ रखरखाव प्रैक्टिस में भी शामिल होंगे।
क्यों अहम है फ्रांस की भागीदारी?
भारतीय सेना के इस युद्धाभ्यास में फ्रांस की भागीदारी अहम है, जिसमें तीन राफेल, एक एमआरटीटी (एयरबस ए330 मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट) विमान और 160 सैनिक शामिल हैं। फ्रांसीसी दूतावास के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार "फ्रांसीसी एयर फोर्स में तीन राफेल, एक मल्टीरोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (एमआरटीटी) विमान और एक ए400एम शामिल होंगे।" इनकी भागीदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दो महीने के मिशन का हिस्सा है जो जून के अंत में शुरू हुआ और 15 अगस्त को समाप्त होगा।
पहले भारतीय वायुसेना ने कब किया था संयुक्त युद्धाभ्यास
भारत का इतिहास कई देशों के साथ एक साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास करने का रहा है। हाल ही में महाजन फायरिंग रेंज में भारत की तीनों सेनाओं ने संयुक्त अभ्यास किया। अकेले जोधपुर में ही फ्रांस के साथ गरुड़ युद्ध अभ्यास के दो संस्करण और ओमान के साथ ईस्टर्न ब्रिज अभ्यास हो चुके हैं।












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