मुलायम सिंह बोले प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गया!
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने प्रधानमंत्री नहीं बन पाने का दर्द एक बार फिर से बयां किया है। उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ मैं प्रधानमंत्री नहीं बना, पीएम बनने के बाद क्या होता बस एसपीजी मेरे आगे पीछे घूमती रहती। उन्होंने कहा कि एक बार मौक चला जाता है तो दोबारा इतनी जल्दी नहीं आता है।
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लखनऊ के सिटी मॉटेसरी स्कूल में शिक्षकों के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देना चाहिए बल्कि ऐसा ज्ञान देना चाहिए कि वह राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन की तरह बन सके। मुलायम सिंह ने कहा कि मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री रहा, देश का रक्षामंत्री रहा और पीएम बनते बनते रह गया।
पीएम के लिए मेरा नाम तय हो गया था
मुलायम सिंह ने कहा कि केंद्र में संयुक्त मोर्चा की सरकार थी और मार्क्सवादी नेता हरकिशन सिंह सुरजीत सिंह मेरे पास आये थे, उन्होने कहा था कि वह मेरा नाम प्रधानमंत्री पद के लिए तय करके आये हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पीएम बनने पर कुछ लोगों ने एतराज जता दिया जिसके चलते मैं पीएम नहीं बन सका।
दबाव के बावजूद रूस से खरीदे थे लड़ाकू विमान
मुलायम सिंह ने कहा कि जब मैं देश का रक्षामंत्री था तो देश की सेना को मैंने बहुत मजबूत किया था। उन्होंने कहा कि रूस से ए-30 लड़ाकू विमान खरीदा था। उस वक्त मुझसे एक नेता ने कहा था कि इस सौदे में पीएम ने कमीशन लिया था इसलिए इस लड़ाकू विमान की डील नहीं करे।
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मुलायम सिंह ने कहा कि मैंने इसके बावजूद लड़ाकू विमान का सौदा किया और मैंने कहा कि अगर कमीशन लिया गया है तो मैं उसकी जांच करवाउंगा लेकिन देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करुंगा। मुलायम सिंह ने तत्कलीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मुझसे कहा था कि हथियारों से देश मजबूत नहीं होता। लेकिन मैंने कहा कि आप गांव नहीं गये जिन घरों में 4-5 हथियार होते हैं लोग उनसे छेड़खानी नहीं करते हैं।
सदमे के चलते हुई थी नेहरूजी की मृत्यु
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु पर बोलते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि नेहरूजी ने चीन पर भरोसा किया था लेकिन बावजूद इसके चीन ने 1962 में भारत पर हमला करके एक लाख वर्गमीटर से अधिक जमीन हथिया ली थी।
मुलायम सिंह ने कहा कि नेहरू जी को कोई बीमारी नहीं थी बल्कि वह चीन के हमले से सदमें में थे जिसके चलते उनकी मौत हुई थी। यही नहीं लाल बहादुर शास्त्री की भी मौत पाक से युद्ध के बाद देश में जो उनपर दबाव बनाया गया उसके चलते वह सदमें में आ गये थे। पाक पर जीत के बावजूद भारत जमीन को अपने कब्जे में नहीं कर सका था जिसको लेकर वह आहत थे।












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