Mukhtar Ansari: यूपी का वो माफिया जिसने जेल में खुदवा दिया था तालाब, 6 मामलों में सजा, फिर खत्म हुई 'मुख्तारी'
यूपी के बाहुबली अपने वर्चस्व को बढ़ाने के लिए कैसे क्राइम की दुनिया एंट्री करता है और देखते ही देखते अचानक इतने अपराध बढ़ते हैं, कि जनता त्राहि- त्राहि करने लगती है। बात किसी और की नहीं बल्कि यूपी के बाहुबली विधायक के नाम से जाने जाने वाले माफिया मुख्तार अंसारी की है, जिनके विरुद्ध दर्ज उन 6 मामलों ने सारी 'मुख्तारी' छीन ली, जिसमें कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।
कुछ के लिए रॉबिनहुड
ठेकेदारी, खनन, स्क्रैप, शराब, रेलवे ठेकेदारी में अंसारी का कब्जा हुआ करता था। कथित रुप से भी बातें सामने आती रहीं कि वो अमीरों से लूटता था, तो गरीबों में बांटता भी था। मुख्तर सड़कों, पुलों, अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों पर मुख्तार अपनी विधायक निधी से 20 गुना अधिक पैसा खर्च करता था।

कौन है मुख्तार अंसारी?
मु्ख्तार अंसारी का जन्म 3 जून 1963 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम नाम सुबहानउल्लाह अंसारी और मां का नाम बेगम राबिया था। गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के परिवार की पहचान वर्षों तक एक प्रतिष्ठित राजनीतिक खानदान के रूप में होती रही। मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। मुख्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाजा गया। मुख्तार के पिता सुबहानउल्लाह अंसारी की गाजीपुर में एक साफ सुधरी छवि के नेता के रूप में थी। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख्तार अंसारी रिस्ते में मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं।
रसूख के दम पर मुख्तार का माफिया राज
माफिया की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक अलग हनक थी। वो पूरी तरह से माफिया राज चला था। लेकिन 6 मामले में उसकी (मुख्तार अंसारी) पूरी दुनिया तबाह कर दी। माफिया का रुतबा जेल में कम नहीं था। वो जेल को एक पनाहगाह के रूप में देखता था और यहीं से अपना पूरा माफिया राज चलाता था।
41 साल पहले रखा था अपराध की दुनिया में कदम
मुख्तार अंसारी देश के कानून को खिलाना समझने की लगातार भूल करता रहा। लेकिन उसे कानून का असली मतलब तब पता चला जब 10 साल की जेल हुई। सजा के साथ ही जेल से मुख्तारी चलाने वाले सारे प्रयास विफल हो गए।
अवधेश राय हत्याकांड में उम्रकैद
3 अगस्त 1991 को कांग्रेस नेता अवधेश राय की गोली मारकर हत्या हुई थी। इस हत्या के बाद मुख्तार ने खुद को बचाने के लिए केस डायरी तक गायब करवा दी थी। लेकिन 32 साल बाद सच की जीत हुई और माफिया मुख्तार को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में जब वाराणसी की एमपी एमएलए कोर्ट में उम्रकैद की सजा सुनाई तो मुख्तार सिर पर हाथ रखकर बैठ गया। दरअसल, अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी मामले में ट्रायल को रोक नहीं पाया।
जेल को बनाया पनाहगाह
एक वक्त ऐसा भी था जब उत्तर प्रदेश की जेलें ही मुख्तार अंसारी के लिए पनाहगाह हुआ करती थीं। जेल में बैठकर वो अपना पूरा माफिया राज चलाता था। जब नवंबर 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णनंद राय हत्या हुई तो भी मुख्तार अंसारी यूपी की फतेहगढ़ जेल में बंद था।
जेल में कभी चलता था मुख्तार का दरबार
पूर्व पुलिस अधिकारियों को मुताबिक मुख्तार अंसारी को राजनीति के बड़े रसूखदार नेताओं का संरक्षण प्राप्त था। मुख्तार जेल में ही पूरा दरबार लगाता था, बड़े बड़े अधिकारी उससे मिलने आते और उसके साथ बैडमिंटन तक खेला करते थे।
जेल में खुदवाया तालाब
वर्ष 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णनंद राय की हत्या से ठीक एक महीने पहले ही मुख्तार अंसारी को गाजीपुर जेल से फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट किया गया था। रिपोर्ट्स की मानें के इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी की की पूरी साजिश थी। तत्कालीन यूपी के आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) रहे बृजलाल के मुताबिक गाजीपुर जेल में मुख्तार अंसारी को वो सारी सुविधाएं मिलती थीं, जो एक शख्स के घर में होती हैं। पूर्व आईजी के मुताबिक अंसारी ने अपनी मनपसंद मछली खाने के लिए उसने जेल में ही तालाब खुदवा दिया था। कई बार तो जिले के कई बड़े अफसर, रसूखदार नेता भी उसके साथ खाना खाने के लिए जेल पहुंच जाया करते थे।
जेल अधीक्षक हत्याकांड में नाम
मुख्तार अंसारी के कारनामों को कभी जेलें रोक नहीं पाईं। लखनऊ में राज भवन के सामने लखनऊ के जेल अधीक्षक आरके तिवारी हत्या हो या फिर नित्यानंद राय की हत्या ये सभी मुख्तार के जेल में रहते हुए ही हुईं। इन हत्याकांड में मुख्तार के करीबी शूटरों का नाम आया। जेल अधीक्षक आरके तिवारी की जब हत्या हुई तो मख्तार अंसीर पर मामले में साजिश रचने का आरोप लगा।












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