MUDA Scam: 'HC का फैसला पत्थर की लकीर नहीं..': कुर्सी बचाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई के मूड में सिद्दारमैया?
Siddaramaiah MUDA Scam: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) से संबंधित कथित घोटाले में अपने खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट के सिंगल जज के फैसले को चुनौती देने की तैयारियों में जुट चुके हैं। उनकी टीम को लगता है कि हाई कोर्ट का फैसले भी खामियां हैं, जिसके आधार पर बड़ी अदालत में उन्हें राहत मिल सकती है।
कर्नाटक के कांग्रेस एमएलए और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कानूनी सलाहकार ए एस पोन्नाना का कहना है कि 'निश्चित रूप से हाई कोर्ट के आदेश में खामिया हैं। जब हम अपील दायर करेंगे, तो मुझे विश्वास है कि अदालत खुद ही त्रुटियों को दूर करेगी।'

सीएम सिद्दारमैया को बचाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस!
सिद्दारमैया के खिलाफ मूडा घोटाले में मुकदमा चलाने की गवर्नर थावरचंद गहलोत की मंजूरी को हाई कोर्ट के जज जस्टिस एम नागप्रसन्ना की अदालत ने सही ठहराया है, जिसके बाद राज्य की कांग्रेस सरकार सीएम के बचाव में सारे घोड़े दौराने की कोशिशों में जुट चुकी है।
सिद्दारमैया को SC में राहत दिलवाने के लिए सिंघवी की होगी एंट्री!
कांग्रेस विधायक का कहना है कि वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी से सलाह लेने के बाद सिद्दारमैया एक-दो दिन में अपने अगले कानूनी विकल्प पर फैसला करेंगे। मंगलवार को अपने आदेश में जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा था कि प्रथमदृष्ट्या, 'अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल करना और मुख्यमंत्री के पद या याचिकाकर्ता (सिद्दारमैया) द्वारा धारित किसी अन्य पद की शक्ति का दुरुपयोग' हुआ है।
'न्यायपालिका पर भी 'विवेक के इस्तेमाल' का सिद्धांत लागू'
लेकिन, पोन्नाना का कहना है कि हाई कोर्ट समेत किसी ने भी यह नहीं दिखाया है कि मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) के साइट अलॉटमेंट घोटाले में सिद्दारमैया का क्या रोल था।
कुर्सी बचाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई के मूड में सिद्दारमैया?
कांग्रेस नेता का कहना है, 'हमारी दलील थी कि गवर्नर ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। 'विवेक के इस्तेमाल' का सिद्धांत न्यायपालिका पर भी लागू होता है। जो रिकॉर्ड में है, आदेश उसी पर आधारित होना चाहिए।' उन्होंने यहां तक दावा कर दिया है कि आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट को तथ्यात्मक पहलुओं के आधार पर जांच करने का अधिकार नहीं है।
कर्नाटक के पूर्व एडिश्नल एडवोकेट जनरल का कहना है कि इन्हीं बिंदुओं पर वे लोग अपील में जाएंगे। वे कह रहे हैं कि हाई कोर्ट के सिंगल बेंच का आदेश अंतिम नहीं है। इससे लगता है कि कांग्रेस अभी इस मसले पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के मूड में है, ताकि सिद्दारमैया के इस्तीफे को लेकर जो दबाव पड़ रहा है, उसे और आगे खींचा जा सके।
'हाई कोर्ट ने जो कहा है, वह पत्थर की लकील नहीं है'
सिद्दारमैया के कानूनी सलाहकार के मुताबिक, 'सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही कानून बनता है। इसलिए हाई कोर्ट ने जो कहा है, वह पत्थर की लकील नहीं है। जज ने जो कुछ कहा है उसे हम स्वीकार नहीं कर सकते।'
कांग्रेस नेता को इस बात पर भी आपत्ति है कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती को 8.24 लाख रुपए के निर्देशित मूल्य के मुकाबले में करीब 56 करोड़ रुपए के 14 प्लॉट दिए गए हैं। वे कहते हैं कि 'जमीन का मूल्य किसे तय करना चाहिए? अगर मैं कह दूं कि विधान सौधा का मूल्य 10 रुपए है, तो क्या इसे मान लिया जाएगा?'












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