MP के एकमात्र जिले ने इन कोशिशों से कोरोना को रखा है दूर

नई दिल्ली- मध्य प्रदेश के 52 में से 51 जिले कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। लेकिन, वहां एक छोटा सा जिला ऐसा है, जिसने खुद को अबतक कोरोना वायरस से सुरक्षित रखा है। निवाड़ी नाम का यह जिला दो साल पहले ही शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में ही टीकमगढ़ से अलग करके बनाया गया था। आज की तारीख में मध्य प्रदेश में कोविड-19 के मामले 10 हजार के आंकड़े तक पहुंचने वाले हैं, लेकिन निवाड़ी में एक भी पॉजिटिव केस नहीं है। जबकि, इस छोटे से जिले में हजारों प्रवासी मजदूर भी आए हैं और हजारों इस जिले से गुजर कर दूसरी जगहों के लिए भी गए हैं। निवाड़ी ने अपनी सीमा से कोरोना वायरस को दूर कैसे रखा है, इसके पीछे एक अधिकारी की सूझबूझ और जिले के लोगों और बाकी महकमों से उन्हें मिला पूरा समर्थन है।

मध्य प्रदेश में 10 हजार पहुंचने वाला है केस

मध्य प्रदेश में 10 हजार पहुंचने वाला है केस

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हिसाब से मध्य प्रदेश में मंगलवार सुबह तक नोवल कोरोना वायरस के 9,638 मामले सामने आ चुके है, जिनमें 6,536 लोग स्वस्थ हो चुके हैं और 414 की मौत हो चुकी है। राज्य के 52 में से 51 जिलों को कोरोना ने जकड़ रखा है। लेकिन, निवाड़ी में आज की तारीख में भी एक भी कोरोना के पॉजिटिव केस नहीं हैं। करीब 1,318 वर्ग किलोमीटर वाला यह जिला मध्य प्रदेश का सबसे छोटा जिला है और इसकी आबादी करीब 4 लाख है। बुंदेलखंड से सटे होने के चलते जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई यह छोटा सा जिला भी बड़ी तादाद में स्थानीय प्रवासी मजदूरों के अपने घरों की ओर जाने का गवाह बना। जिला प्रशासन के मुताबिक अबतक करीब 19,000 स्थानीय प्रवासी मजदूर निवाड़ी लौटे हैं। जबकि, 80,000 से ज्यादा इसी जिले से गुजरकर अपने घरों की ओर लौटे हैं। लेकिन, फिर भी इसने कोरोना से खुद को बचाकर रखा है।

जिला कलेक्टर की हो रही है तारीफ

जिला कलेक्टर की हो रही है तारीफ

स्थानीय लोगों की मानें तो अगर लॉकडाउन के दौरान जिले के कलेक्टर अक्षय सिंह ने खुद आगे रहकर निवाड़ी को नहीं संभाला होता तो शायद आज निवाड़ी कोरोना मुक्त नहीं रह पाता। उनकी निगरानी में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने शहर से लेकर गांव तक स्क्रीनिंग का काम लगातार जारी रखा, जबकि वह जानते थे कि जिले में एक भी पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। कलेक्टर ने एक डिस्ट्रिक्ट क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बनाकर उसमें सांसद,विधायक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, स्वयं सेवियों के साथ लगातार बैठकें कीं और सबके उचित सुझावों को पूरा तबज्जो दिया। प्रशासन ने लोगों को मास्क पहनाने के लिए शुरू से उनपर नजर रखना शुरू किया और जो बिना मास्क में दिखते उनका 100 रुपये का चालान काटना शुरू कर दिया। नतीजा ये हुआ कि लोग भी बहुत जल्द ही वास्तविकता को समझने लगे कि सुरक्षा ही वायरस से बचने का एकमात्र उपाय है। अभी तक की स्थिति के अनुसार जिले में अब तक 20,000 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

हर पहलू पर रखी गई नजर

हर पहलू पर रखी गई नजर

खास बात ये है कि अक्षय सिंह तब से निवाड़ी के कलेक्टर हैं, जब से 2018 में यह जिला बना है। उनका कहना है कि अबतक कोरोना के मामले नहीं आए हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि हम उत्सव मनाना शुरू कर दें। क्योंकि, एक केस आते ही सारे किए-कराए पर पानी फिर सकता है। सबसे बड़ी बात ये है कि नया जिला होने की वजह से इसका अपना हेल्थ सेटअप नहीं है और इसका स्वास्थ्य विभाग का मुख्य कार्यालय अभी भी टीकमगढ़ से ही संचालित होता है। प्रशासन के मुताबिक जिले में आने वाले 90 फीसदी प्रवासी मजदूरों को होम क्वारंटीन किया गया और सिर्फ 5 फीसदी ही इंस्टीट्यूटनल क्वारंटीन किए गए। बाकी, 5 फीसदी प्रशासन की नजर से बच निकले। सबसे बड़ी बात ये है कि यह ऐसा जिला है जिसने प्रवासियों को उनकी जगह तक पहुंचाने के लिए 30 बसें भी लगाए और इसके साथ ही उनके नाश्ते-खाने और भी बाकी चीजों का इंतजाम कराया। यही नहीं अब तक जिले में 8,000 मजदूरों को मनरेगा के तहत काम भी मिल चुका है। (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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