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मस्जिद के इमामों को मिलने वाली सैलरी पर हंगामा, जानें किस राज्य में कितना वेतन पाते हैं मौलवी

mosque Imam salary, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रवेश वर्मा ने मस्जिदों में मुअज्जिनों और इमाम को मिलने वाली सैलरी का मुद्दा उठाया है। दिल्ली चुनावों में अब ये मुद्दा गर्मा गया है। इमाम और मुअज्जिनों की तरह ही मंदिर के पुजारियों और गुरुद्वारे के ग्रंथियों को भी मासिक वेतन देने की मांग उठा रही है। वर्मा ने इस संबंध में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है।

बीजेपी सांसद ने उठाया मुद्दा

बीजेपी सांसद ने उठाया मुद्दा

पश्चिम दिल्ली के सांसद ने कहा, 'मैं सभी मंदिरों और गुरुद्वारों के पुजारियों और ग्रंथियों से अपील करता हूं कि वे 42,000 रुपये मासिक वेतन के लिए केजरीवाल को पत्र लिखें।' उन्होंने कहा, 'अगर वह तीन दिनों में अपना निर्णय बताने में विफल रहते हैं, तो मंदिरों और गुरुद्वारों के बाहर आप कैंडिडेट के प्रतिबंध का बोर्ड लगा दिया जाना चाहिए। यहां तक कि मुख्यमंत्री के प्रवेश को भी तब तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए जब तक कि वेतन का भुगतान की घोषणा ना कर दी जाए।

इमामों को कौन देता है सैलरी

इमामों को कौन देता है सैलरी

इमाम और मुअज्जिनों को हर महीने मिलने वाली सैलरी वक्फ बोर्ड के द्वारा जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 में अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष मौलाना जमील इलियासी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वक्फ बोर्ड को उसके मैनेजमेंट वाली मस्जिदों में इमामों को वेतन देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद से दिल्ली समेत कई राज्यों में वक्फ बोर्ड इमामों को सैलरी देता है।

ये हैं आय के स्रोत

ये हैं आय के स्रोत

वक्फ बोर्ड की आय का मुख्य साधन मस्जिदों में बनी दुकानें-प्रॉपर्टी के किराए, दरगाह और खानकाह के जरिए आने वाली रकम होती है। इन स्रोतों से मिलने वाले पैसे में से उस संपत्ति की स्थानीय कमेटी 93 फीसदी दिया जाता है। बाकी 7 फीसदी आय को राज्य वक्फ बोर्ड को देती है, जिसमें 1 फीसदी सेंट्रल वक्फ काउंसिल को चला जाता है। राज्य वक्फ बोर्ड इसी सात फीसदी पैसे मस्जिद के कर्मचारियों और प्रबंधन पर पैसा खर्च करता है। वक्फ बोर्ड इसी आय में से अपनी मस्जिदों के इमामों और मोअज्जिन को सैलरी देता है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड हर महीने देता है इतनी सैलरी

दिल्ली वक्फ बोर्ड हर महीने देता है इतनी सैलरी

आपको बता दें कि, दिल्ली वक्फ बोर्ड की पंजीकृत करीब 185 मस्जिदों के 225 इमाम और मुअज्जिनों को तनख्वाह दी जाती है। दिल्ली सरकार की ओऱ से इमाम को 18 हजार रुपये और मुअज्जिनों को 14 हजार रुपये प्रति महीने सैलरी दी जाती है। इसके आलावा दिल्ली वक्फ बोर्ड में अनरजिस्टर्ड मस्जिदों के इमामों को 14000 रुपए और मुअज्जिनों को 12 हजार रुपये प्रति माह का मानदेय दिया जाता है।

तेलंगाना में मौलवियों को हर महीने मिलता है मानदेय

तेलंगाना में मौलवियों को हर महीने मिलता है मानदेय

'आज तक' की खबर के मुताबिक, तेलंगाना में इस साल जुलाई से इमामों और मुअज्जिनों को हर महीने 5,000 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार साल 2012 से ही इमामों को हर महीने 2,500 रुपये मानदेय दे रहा है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड इमाम को 5000 रुपये महीना और मुअज्जिनों को 4500 रुपये महीने दिए जाते हैं। हरियाणा में वक्फ बोर्ड अपनी मस्जिदों के 423 इमामों को प्रतिमाह 15000 रूपए का वेतन देता है।

बिहार हर महीने इमाम को मिलते हैं 15000

बिहार हर महीने इमाम को मिलते हैं 15000

इसी तरह बिहार में 2021 से सुन्नी वक्फ बोर्ड अपनी मस्जिदों के इमाम को 15 हजार और मोअज्जिनों को 10 हजार रुपये मानदेय दे रहा है। वहीं बिहार स्टेट शिया वक्फ बोर्ड 105 मस्जिदों के इमाम को 4000 और मोअज्जिनों को 3000 रुपये मानदेय दे रहा है। बिहार सरकार सालाना 100 करोड़ रुपये का फंड वक्फ बोर्ड को अनुदान के तौर पर देती है।

 वक्फ बोर्ड सैलरी के लिए पैसा कहां से लाता है

वक्फ बोर्ड सैलरी के लिए पैसा कहां से लाता है

दिल्ली के अलावा हरियाणा और कर्नाटक में मस्जिदों के इमाम को वक्फ बोर्ड सैलरी देता है। कई राज्यों में वक्फ बोर्ड कुछ मस्जिदों के इमाम को काफी पहले से ही सैलरी दे रहा है। इसें वे मस्जिदें शामिल हैं जिनकी पुरातत्व विभाग देख रेख करता है और जो ऐतिहासिक महत्व की मस्जिदें हैं। अब सवाल उठता है कि वक्फ बोर्ड सैलरी के लिए पैसा कहां से लाता है।

कर्नाटक इमामों को शहरों के हिसाब से सैलरी देता है

कर्नाटक इमामों को शहरों के हिसाब से सैलरी देता है

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने पंजीकृत मस्जिदों के इमाम को सैलरी शहर के हिसाब से देता है। जिसमें बड़े शहरों में इमाम को 20 हजार, नायब इमाम को 14000, मोअज्जिन को 14000, खादिम को 12000 और मुल्लिम को 8 हजार रुपये देता है। वहीं कस्बे या नगर की मस्जिद के इमाम को 15000 और ग्रामीण में इमाम को 12000 रुपये सैलरी के तौर पर दिए जाते हैं। पंजाब में भी वक्फ बोर्ड की मस्जिदों के इमाम को सैलरी दी जाती है।

यूपी में इमामों को नहीं मिलती सैलरी

यूपी में इमामों को नहीं मिलती सैलरी

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड मस्जिदों के इमाम और मुअज्जिन को सैलरी नहीं देते है। उत्तर प्रदेश में कुछ ऐतिहासिक मस्जिदों के इमाम को सैलरी दी जाती है, जो खासकर पुरातत्व विभाग के अंडर में हैं। इनमें ताजमहल मस्जिद, लखनऊ में राजभवन की मस्जिद, फतेहपुर सीकरी जैसी मस्जिद के इमाम को सैलरी यूपी वक्फ बोर्ड देता है।

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