आधे से ज्यादा भारत सूखे की चपेट में, जलाशय-तालाब में सूखा, पीने के पानी का अकाल

नई दिल्ली। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के सामने आने के बाद देश में सूखे को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार आधे से ज्यादा देश के हिस्सों में सूखे की स्थिति है, जिसकी वजह से लाखों लोगों को पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जिस तरह से झीलों का पानी सूख रहा है, ग्राउंड वाटर लेवल कम हो रहा है, मानसून तय समय पर नहीं आ रहा है, उसने हालात को काफी चिंताजनक बना दिया है। सूखे की वजह से लोगों को पीने के पानी के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार खराब मानसून की वजह से गर्मियों में लगाई जाने वाली कई अहम फसलों पर असर पड़ा है।

आधे से ज्यादा देशों में सूखा

आधे से ज्यादा देशों में सूखा

मौसम विभाग के अनुसार 22 जून तक मानसून 39 फीसदी कम रहा है, हालांकि पिछले कुछ दिनों में बारिश के बाद माना जा रहा था कि हालात बेहतर होंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। रविवार के बुलेटिन के अनुसार मानसून महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित पूर्वी यूपी के कुछ ईलाकों में मानसून आ सकता है। लेकिन मौसम में आए बदलाव की वजह से देश के कई राज्यों में पानी की काफी समस्या हो रही है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक,तेलंगाना, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य सूखे के हालात से गुजर रहे हैं।

मानसून में देरी

मानसून में देरी

देश के अधिकतर इलाके काफी ज्यादा सूखे की स्थिति से गुजर रहे हैं, जहां बारिश काफी कम हुई है। स्टैंडर्ड प्रेसिपिटेन इंडेक्स के अनुसार देश के अधिकतर राज्यों में पानी का संचय काफी कम हुआ है। मानसून में देरी की वजह से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। हालांकि आने वाले हफ्ते में हालात बेहतर हो सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार देश के 51 फीसदी हिस्सों में बारिश अपेक्षाकृत कम हुई है। जिसकी असर कृषि पर भी पड़ा है।

जलाशय सूखे

जलाशय सूखे

20 जून तक के सेंट्रल वॉटर कमीशन के आंकड़े के अनुसार देश के 91 राष्ट्रीय बेसिन और जलाशयों में पानी की कमी है, जिसकी वजह से बिजली उत्पादन और पीने के पानी पर असर पड़ा है। यह पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। वहीं 10 साल के आंकड़ों के लिहाज से यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। तेलंगाना में जलाशयों की बात करें तो यह सामान्य स्तर से 36 फीसदी कम है। आंध्र प्रदेश में यह 83 फीसदी, कर्नाटक में 23 फीसदी, तमिलनाडु में 43 फीसदी, केरला में 38 फीसदी सामान्य से कम है। औसत संचय की बात करें तो यह पिछले 10 साल के औसत से कम है।

चेन्नई में पानी की विकट समस्या

चेन्नई में पानी की विकट समस्या

चेन्नई उन शहरों में शामिल है जहां पीने की पानी की काफी ज्यादा दिक्कत है। तमिलनाडु के तीन जलाशय पूंडी, चोलावरम, चेंबरंबकम जोकि पूरे चेन्नई को पानी मुहैया कराते हैं, यहां पानी काफी कम हो गया है। कई पानी के संसाधन भी सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। वहीं कुछ नदियों के ताल की बात करें तो यह सूखे की स्थिति पर हैं। तापी बेसिन में पानी 81 फीसदी कम हो गया है, साबरमती का पानी 42 फीसदी, कृ्णा का पानी 55 फीसदी, कावेरी बेसिन का पानी 45 फीसदी और गंगा बेसिन का पानी 9 फीसदी कम हो गया है।

कुछ चौंकाने वाले तथ्य

कुछ चौंकाने वाले तथ्य

  • देश के 91 जलाशयों में 80 फीसदी पानी की कमी
  • 91 जलाशयों में से 11 जलाशय पूरी तरह से सूख चुके हैं
  • सेंट्रल इंडिया के 10 सबडिविजन में से सिर्फ ओडिशा डिवीजन में सामान्य बारिश हुई। जबकि बाकी में सूखे की स्थिति है
  • दक्षिण के 10 डिविजन की बात करें तो आठ में पानी का अकाल है।

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