त्रिपुरा में रहेंगे 30000 ब्रू शरणार्थी, मिलेगी नागरिकता, फ्री घर-राशन
नई दिल्ली। पिछले 25 साल से मिजोरम और त्रिपुरा के बीच चल रहा ब्रू जनजाति के शरणार्थियों का मुद्दा गुरुवार को सुलझ गया। नए समझौते के तहत मिजोरम के 30 हजार से ज्यादा ब्रू शरणार्थियों को स्थाई रूप से त्रिपुरा में बसाया जाएगा। इसे लेकर गुरुवार को दिल्ली में अमित शाह और तीन पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ। इसके साथ ही उन्हें सरकार की तरफ से वित्तीय मदद भी दी जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ब्रू शरणार्थियों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को मिजोरम से ब्रू शरणार्थियों के संकट को खत्म करने और त्रिपुरा में उनके निपटाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब और मिजोरम के मुख्यमंत्री गोरमथांगा की मौजूद रहे। केंद्र सरकार ने त्रिपुरा में 30,000 से ज्यादा ब्रू शरणार्थियों को बसाने का फैसला किया है। इन शरणार्थियों की मदद के लिए सरकार ने 600 करोड़ रुपये का पैकेज भी तय किया है।
अमित शाह ने बताया, सरकार इन ब्रू शरणार्थियों के परिवार के नाम 4 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट करेगी। इसके साथ ही 40X30 फीट का आवासीय प्लॉट दिया जाएगा। इस प्लॉट पर घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये भी दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार इन्हें 2 साल तक 5000 रुपये प्रति माह की नकद सहायता करेगी और दो साल तक सरकार की ओर से राशन बिल्कुल फ्री दिया जाएगा। इतना ही नहीं ब्रू जनजाति को त्रिपुरा के वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, सभी आदिवासी भाइयों को बधाई कि पिछले कई साल से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ। त्रिपुरा सीएम, मिजोरम सीएम और अन्य नेताओं को भी बधाई। 1997 में मिजोरम से करीब तीस हजार लोग त्रिपुरा में अस्थायी कैंप में रखे गए। इनको सम्मान के साथ रखने की व्यवस्था की गई थी। 'भारत सरकार के इस फैसले से 30 हजार से ज्यादा ब्रू शरणार्थियों के लिए एक नए जीवन की शुरुआत होगी। ये लोग 23 साल तक अमानवीय जीवन जीने के लिए मजबूर थे। सीएम त्रिपुरा बिप्लब देब ने कहा कि, यह एक ऐतिहासिक कदम है। मैं पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को त्रिपुरा के लोगों की तरफ से शुक्रिया कहना चाहूंगा।












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