लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने के मूड में नहीं है मोदी सरकार!
नई दिल्ली। कर्नाटक में लिंगायत धर्म को अलग धर्म की मान्यता को देकर अब केंद्र और राज्य आमने-सामने आते दिख रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का फैसला लिया था। लेकिन कर्नाटक सरकार के फैसले को केंद्र सरकार मंजूरी देने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट के साथ बैठक की थी। बुधवार को हुई इस बैठक में बहुमत में कैबिनेट लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देने के खिलाफ था। कैबिनेट ने कर्नाटक सरकार के फैसले की आलोचना की। कैबिनेट में कहा गया है कि लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने से दलितों के आरक्षण में कमी आएगी।

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में राम विलास पासवान ने कर्नाटक सरकार के फैसले का विरोध किया, उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून के मुताबिक सिर्फ हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म से जुड़े दलितों को आरक्षण दिया जा रहा है, उन्हें नौकरी और शैक्षणिक संस्थान में कोटा दिया जा रहा है। वहीं कर्नाटक से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि कैसे 2013 में पिछली यूपीए सरकार ने भी लिंगायत और वीरशैव को प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी।
गुरुवार को रामविलास पासवान ने कहा था कि इस संप्रदाय में कई ऐसे लोग हैं जो एससी हैं, ऐसे में अगर उन्हें अलग धर्म की मान्यता दी जाती है तो उन्हें एसी श्रेणी के तहत मिलने वाला आरक्षण नहीं मिलेगा। सिर्फ सिख, हिंदू और बौद्ध धर्म के एससी को यह आरक्षण मिलता है। ऐसे में आखिर क्यों उन्हें उनके आरक्षण से दूर किया जा रहा है। जिस तरह से राम विलास पासवना ने इस मुद्दे को लेकर खुलकर अपनी राय रखी थी उसके बादद साफ है कि केंद्र सरकार कांग्रेस के इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देगी। माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर आगामी कर्नाटक चुनाव में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने आ सकते हैं।
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