डार्विन के सिद्धांत को नकारने वाले पीएम मोदी के पूर्व मंत्री बोले, हम ऋषियों के वंशज
नई दिल्ली: मानव के क्रमिक विकास के चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत को नकारने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आज लोकसभा में एक और बयान दिया। बीजेपी के सांसद सत्य पाल सिंह ने लोकसभा में कहा कि उनका मानना है कि भारतीय बंदरों के बजाय ऋषियों (संतों) के वंशज थे। उनके इस बयान पर विपक्ष के सांसद महुआ मोइत्रा और कनिमोझी ने विरोध दर्ज किया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के खिलाफ दिए गए बयान का विरोध किया। सत्यपाल मलिक ने मानवाधिकार बिल पर चल रही चर्चा में हिस्सा लेते समय ये विवादित बयान दिया।

सत्यपाल सिंह बोले-हम ऋषियों की संतान
सत्यपाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति मानवाधिकारों को महत्व नहीं देती है और इसमें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की अवधारणा नहीं है। हमारी संस्कृति कहती है कि हम ऋषियों की संतान हैं। मैं उन लोगों को रोकना नहीं चाहता, जो मानते हैं कि हम बंदरों के बच्चे हैं, लेकिन हमारी संस्कृति के अनुसार हम ऋषियों की संतान हैं। सिंह पिछली बीजेपी सरकार में शिक्षा राज्यमंत्री थे। इसका तुरंत विरोध करने वालों में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या आपकी माँ एक गाय है। सिंह ने कहा कि जो लोग मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की कीमत नहीं समझते वो मुझे रोकेंगे।

'हमें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं'
बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति कहती है कि यहा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की कोई आवश्यकता नहीं है। हमें ईमानदार लोगों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। हमें लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करने की आवश्यकता है जिस तरह से वो हमारे साथ करते हैं। हमें सभी प्राणियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। यह हमारी संस्कृति के आदर्श हैं।

पहले भी दे चुकें हैं विवादित बयान
गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने पहले दावा किया था कि मानव के क्रमिक विकास का चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से गलत है। मंत्री ने यह भी कहा था कि विज्ञान के छात्र के तौर पर उनका मानना है कि उनके पूर्वज बंदर नहीं थे। उनकी टिप्पणियों पर हमला बोलने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी अन्य व्यक्ति के नजरिये की निंदा करना वैज्ञानिक भावना नहीं है। महाराष्ट्र काडर में 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सत्यपाल सिंह 2014 में ही चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। सत्यपाल सिंह सांसद बनने ने पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर थे और सेवा के दौरान वह इस पद से इस्तीफा देने वाले पहले अधिकारी थे।












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