सीमा पार कर म्यांमार से भारत आ रहे लोगों को हर हाल में रोकें उत्तर-पूर्वी राज्य: गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्वी राज्यों से म्यांमार के लोगों की आमद को रोकने के लिए कहा है।
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्वी राज्यों से म्यांमार के लोगों की आमद को रोकने के लिए कहा है। गृह मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी रैंक के एक अधिकारी ने नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिवों और अमस राइफल्स के महानिदेशों को लिखे एक पत्र में कहा है कि वह सतर्क रहें और अगर कोई भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करता है तो उसे हर हाल में रोकें।

10 मार्च को लिखे गए इस पत्र में 2017 की एक एडवाइजरी (सलाह) का भी हवाला दिया गया है, जिसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन से कहा गया था कि वह कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के माध्यम से अवैध प्रवासियों की पहचान करें और बिना दे री किये उनके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करें। पत्र में यह भी कहा गया है कि म्यांमार से अवैध लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है। पत्र के जरिए राज्य सरकारों को यह भी बताया गया है कि म्यांमार प्रशासन ने मिजोरम में अपने समकक्षों से कहा है कि यदि पिछले कुछ दिनों में म्यांमार से सीमा पार कर लोग भारत आएं हैं तो उन्हें पुलिस को सौंपा जाए।
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आपको बता दें कि भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे मणिपुर और मिजोरम में म्यांमार के लोगों को समर्थन प्राप्त है, जिसकी वजह से वह आसानी से भारत में आ जाते हैं। म्यांमार में चल रहे प्रदर्शनों के लिए भी उत्तर-पूर्व के लोग वहां के लोगों का समर्थन कर रहे हैं। वहां की राज्य सरकारों ने भी कहा है कि अगर केंद्र सरकार अनुमति दे तो वे शरणार्थियों को पनाह देने को तैयार हैं। लेकिन 10 मार्च को लिखे गए पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि, 'राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के पास किसी भी विदेशी को शरणार्थी का दर्जा देने की शक्ति नहीं है और भारत 1951 के संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन और इसके 1967 के प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आपसे कानून के अनुसार म्यांमार से अवैध आमद को जांचने का अनुरोध किया गया है।'
मालूम हो कि म्यांमार के हालात इन दिनों ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले महीने वहां की सेना ने तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथों में ले ली थी और वहां की नेता नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू को हिरासत में लेकर आपातकाल घोषित कर दिया था। जिसके बाद से वहां सेना के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहें हैं। अभी तक कई लोगों की इन प्रदर्शनों में जान जा चुकी है। म्यांमार की सेना ने अपदस्थ सरकार की नेता सू की के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं।












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