Mehul Choksi CBI Trap: कैसे चंगुल में फंसा घोटाले का 'मास्टरमाइंड' मेहुल? कानूनी दांव से चारों खाने चित्त!
Mehul Choksi CBI Trap News: एक वक्त था, जब हीरों की दुनिया में मेहुल चोकसी का नाम चमकता था - लेकिन आज वही नाम घोटाले, जालसाजी और धोखाधड़ी का पर्याय बन चुका है। जिस चोकसी ने भारत को करोड़ों का चूना लगाया, अब उसकी पैरतेबाजी और चालाकी की परतें 12 अप्रैल 2025 को तार-तार हो चुकी हैं।
इस दिन सीबीआई ने आखिरकार उस भगोड़े हीरा कारोबारी को बेल्जियम के एंटवर्प में पकड़ लिया, जहां वह इलाज कराने के बहाने छिपा बैठा था। लेकिन यह गिरफ्तारी किसी अचानक हुई कार्रवाई का नतीजा नहीं थी। इसके पीछे थी सालों की रणनीति, इंटरनेशनल लॉ, डिप्लोमैटिक टॉक्स और बेलगाम निगरानी। आइए जानें, कैसे इस बहुरूपिए को अंतरराष्ट्रीय जाल में फंसाया गया...

भगोड़े की दुनिया में प्रवेश
जनवरी 2018 - चोकसी अचानक देश से गायब। पंजाब नेशनल बैंक को 13,500 करोड़ रुपये का चूना लगाकर वो फरार हुआ। जल्द ही पता चला कि उसने एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले ली है। मगर कहानी यहीं खत्म नहीं होती - ये तो सिर्फ शुरुआत थी।
अगवा हुआ या खुद भागा? डोमिनिका की रहस्यमयी रात
23 मई, 2021 - चोकसी डोमिनिका में 'अचानक' पाया जाता है। दावा करता है कि भारतीय एजेंट्स ने उसका अपहरण कर लिया। अपहरण, यातना, अदालत, याचिका - डोमिनिका की अदालत में सुनवाई शुरू हुई, और सरकारें हिल गईं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाए कि यह भारत की साजिश थी। लेकिन सच्चाई ये थी कि चोकसी खुद भी चालबाजियों में उस्ताद था। उसके पास सब कुछ था - पैसा, पासपोर्ट, प्लान बी, और ढेर सारे वकील।
CBI का मास्टरप्लान: 'ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर' से ट्रैकिंग
सीबीआई ने हार नहीं मानी। उसका ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर (GOC) लगातार उस पर नजर रख रहा था। जुलाई 2024 में मेहुल चोकसी को एंटवर्प, बेल्जियम में ट्रैक कर लिया। वहां वह 'इलाज' के बहाने पहुंचा था। इस बार भारत ने कोई चूक नहीं की, क्योंकि भारत और बेल्जियम के बीच 1901 से प्रत्यर्पण संधि मौजूद है। डोमिनिका जैसी गलती नहीं दोहराई जानी थी। इस बार सीधा कानूनी दांव चला गया।
पैने कानूनी दांव, बेल्जियम को दिए गए दस्तावेज
CBI ने 27 अगस्त, 2024 को बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को चोकसी के खिलाफ सबूतों की लंबी फेहरिस्त सौंपी। इनमें मुंबई की अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट, चार्जशीट और इंटरपोल रेड नोटिस शामिल था।
प्रत्यर्पण का आधार?
- IPC की धारा 120B (साजिश), 201, 409 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 477A
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13
- संयुक्त राष्ट्र के भ्रष्टाचार और संगठित अपराध के कन्वेंशन
CBI ने ये भी दिखाया कि ये सारे अपराध बेल्जियम में भी दंडनीय हैं, यानी 'डुअल क्रिमिनैलिटी' का नियम भी फिट बैठता है। सीबीआई के अधिकारी बेल्जियम गए, केस समझाया, सबूत रखे और हर शंका का समाधान किया।
आखिरकार गिरफ्तारी - गिरफ्त में आया 'हीरों' का शातिर सौदागर
- 25 नवंबर, 2024 को बेल्जियम ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया।
- 12 अप्रैल, 2025 को चोकसी को गिरफ्तार कर लिया गया।
वह अब बेल्जियम की अदालत में पेश होने वाला है, और भारत जोर लगा रहा है कि उसे तब तक हिरासत में रखा जाए, जब तक प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी न हो।
आखिरी दांव या फाइनल गिरफ्त?
भारत ने बेल्जियम को आगाह किया है - अगर अब भी चोकसी को न सौंपा गया, तो वो फिर भाग सकता है। इंटरपोल का रेड नोटिस पहले ही हट चुका है, और ये शातिर पहले भी दुनिया की नजरों से ओझल होता रहा है।
लेकिन इस बार माहौल अलग है - सबूत पुख्ता हैं, कानून की ग्राउंड मजबूत है और चोकसी का पिछला इतिहास अब उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है।
एंडगेम शुरू हो चुका है
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत में क्या होता है। क्या भारत उस 'हीरा' को वापिस ला पाएगा जिसने देश को लूटा, या फिर ये कहानी किसी और मोड़ पर एक और नया पेज खोलेगी?
एक बात तो तय है - मेहुल चोकसी की पैरतेबाजी अब जाल में उलझ चुकी है। उसकी चालाकियों की किताब अब खत्म होने को है।












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