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J&K:आलीशान गेस्ट हाउस में नजरबंद महबूबा मुफ्ती को झटका, PDP के कई बड़े नेता BJP में शामिल

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर की बड़ी राजनीतिक पार्टी पीडीपी को बहुत बड़ा झटका लगा है। पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती पिछले चार-पांच अगस्त से श्रीनगर के एक आलीशान सरकारी गेस्ट हाउस में बंद हैं और उनकी पार्टी के कई कद्दावर नेता आर्टिकल 370 खत्म करने के समर्थन में बीजेपी का कमल थाम रहे हैं। पीडीपी चीफ के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये हो सकती है कि बीजेपी में शामिल होने वालों में जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के अध्यक्ष हाजी अनायत अली भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि पीडीपी के नेताओं को भाजपा में लाने में लद्दाख के पार्टी सांसद जमग्याल तसेरिंग नामग्याल की बड़ी भूमिका रही है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पार्टी को मिल रहे इस समर्थन से बीजेपी नेताओं के हौसले काफी बुलंद हैं और इसलिए वह एक सितंबर से आर्टिकल 370 पर कश्मीर घाटी समेत पूरे देश में बड़ा जनसंपर्क और जन-जागरण अभियान चलाने वाले हैं।

नड्डा की मौजूदगी में पीडीपी के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल

नड्डा की मौजूदगी में पीडीपी के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल

पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती पिछले 4-5 अगस्त से श्रीनगर स्थित जम्मू-कश्मीर पर्यटन विकास निगम के आलीशान गेस्ट हाउस 'चश्मे शाही' में नजरबंद हैं। खबरें यहां तक है कि सरकार ने उन्हें नजरबंदी से मुक्त करने का विकल्प भी दिया है, लेकिन वो फिलहाल सरकारी शर्तें मानने और जनता का सामना करने से बचने के लिए नजरबंदी को ही ज्यादा महफूज समझ रही हैं। इसी असमंजस में सोमवार को उन्हें बीजेपी ने तब बड़ा झटका दे दिया जब हाजी अनायत अली जैसे पार्टी के बड़े चेहरे ने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ले ली। जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के अध्यक्ष हाजी अली के अलावा करगिल के और कई बड़े नेताओं ने भी कमल थामा है, जिसमें लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के कार्यकारी पार्षद मोहम्मद अली हासन के अलावा 6 और नेता भी शामिल हैं। मबहबूबा के लिए दिक्कत ये है कि इनमें से ज्यादातर नेता उन्हीं की पार्टी के हैं और सबने आर्टिकल 370 हटाने के समर्थन में ये कदम बढ़ाया है।

घाटी में भी रैलियां करेगी बीजेपी

घाटी में भी रैलियां करेगी बीजेपी

आने वाले 1 सितंबर से 30 तक पार्टी जो आर्टिकल 370 हटाने के समर्थन में व्यापक जनसंपर्क और जनजागरण अभियान शुरू करने जा रही है, उसमें कश्मीर घाटी के अलगाववाद प्रभावित इलाके भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक कश्मीर की जनता तक राष्ट्रीय भावना पहुंचाने के लिए पार्टी ने श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और सोपोर जैसे इलाकों को भी चुना है, जो अबतक अलगाववाद और आतंकवाद प्रभावित इलाके माने जाते रहे हैं। बता दें कि आर्टिकल 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने के पहले ही पार्टी ने घाटी के इन इलाकों में सदस्यता अभियान बढ़ाने पर काफी जोर दिया था और उसे तब उसमें काफी सफलता भी मिली थी। पार्टी ने 15 अगस्त को सभी ग्राम पंचायतों में तिरंगा फहराने का अभियान भी चलाया था।

35 बड़े और 370 छोटे शहरों में विशेष कार्यक्रम करेगी बीजेपी

35 बड़े और 370 छोटे शहरों में विशेष कार्यक्रम करेगी बीजेपी

जम्मू-कश्मीर के अलावा बीजेपी प्रदेश में लिए गए मोदी सरकार के फैसले को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है। इस दौरान पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लोगों के बीच जाकर बताएंगे कि आर्टिकल 370 हटाना क्यों जरूरी था। देश की जनता को संदेश देने के लिए ही पार्टी ने इसके लिए 35 बड़े और 370 छोटे शहरों को चुना है। क्योंकि, सरकार के फैसले से आर्टिकल 370 के अलावा आर्टिकल 35ए भी इतिहास बन चुका है। वैसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ इलाकों समेत बीजेपी नेताओं की ओर से थोड़े-बहुत कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर अभी चलाए भी जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र शिंह शेखावत के मुताबिक योजना के अनुसार अभियान के पहले चरण में लोगों को बताया जाएगा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रदेश की तेज गति से विकास के लिए कितना आवश्यक था।

अबतक बीजेपी ने इसे भुनाने से परहेज किया है

अबतक बीजेपी ने इसे भुनाने से परहेज किया है

बता दें कि मोदी सरकार के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने अबतक बड़े पैमाने पर जश्न मनाने से परहेज किया है। लेकिन, जैसे-जैसे घाटी में स्थिति पटरी पर लौटने के संकेत मिल रहे हैं, पार्टी ने इसके राजनीतिक लाभ लेने पर नजरें गड़ा दी हैं। जानकारों की राय में इस मुद्दे पर कांग्रेस ने जिस तरह से उल्टा स्टैंड लिया है, उसे देखते हुए बीजेपी और उत्साहित है और हो सकता है कि उसके महीने भर के अभियान में टकराव की स्थिति भी पैदा हो जाए। क्योंकि, अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे पर चर्चा करते रहे हैं, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को पीएम मोदी ने आगे लंबी लड़ाई की बात कहकर संभलकर चलने की ही नसीहत दे रखी है।

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