पीएम मोदी के 5 तुरुप के इक्के, जिन्होंने डोकलाम पर चीन को पीछे हटने पर किया मजबूर
डोकलाम पर चीन से जारी विवाद टालने में सबसे अहम रोल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने निभाया।
नई दिल्ली। डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच पिछले कुछ दिनों से जारी विवाद अब थम गया है। भारत ने कूटनीतिक जीत दर्ज करते हुए चीन को आखिरकार अपने पैर पीछे खींचने को मजबूर कर दिया। भारत और चीन दोनों ने ही डोकलाम सीमा से अपनी सेना हटाने को लेकर अहम फैसला लिया है। साथ ही चीन ने अपना अड़ियल रुख छोड़कर रोड बनाने का काम भी रोकने का फैसला लिया है।
यूं चीन बैकफुट पर आया
चीन के इस तरह से बैकफुट पर आने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की वो रणनीति अहम थी जिसमें उन्होंने चीन को उसी के अंदाज में जवाब देने का फैसला लिया। भारत ने डोकलाम से अपनी सेना नहीं हटाने के फैसला लिया, साथ ही चीन की ओर से जारी बयानबाजी का करारा जवाब दिया गया। हालांकि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया और दोनों ही देशों ने विवाद को टालने का फैसला लिया। डोकलाम पर भारत की इस जीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच अधिकारियों का रोल बेहद अहम रहा. आइये जानते हैं कौन हैं वो अधिकारी...

अजित डोवाल- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
डोकलाम पर चीन से जारी विवाद टालने में सबसे अहम रोल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने निभाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैम्बर्ग दौरे के बाद बीजिंग में चीन के अपने समकक्ष यांग जेइकी से मुलाकात की। ये पहली आधिकारिक मुलाकात थी जिसमें दो बड़े अधिकारियों ने डोकलाम विवाद पर खुलकर चर्चा की। शांति बनाए रखने को लेकर दोनों देशों के बीच ये बातचीत हुई, जिसमें अजित डोवाल ने साफ कर दिया कि भारत अपने रुख पर कायम है। अजित डोवाल सेना और राजनयिकों के बीच मुख्य संयोजक थे। सीमा पर तनाव के बीच उन्होंने लगातार भूटान को बचाव और सुरक्षा का आश्वासन दिया।
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जनरल बिपिन रावत- सेना प्रमुख
डोकलाम विवाद पर चीन को पीछे धकेलने में आर्मी चीफ बिपिन रावत का रोल भी बेहद अहम रहा। उन्होंने पूरे हालात पर नजरें गड़ाए रखी। उन्होंने निश्चिन्त किया कि चीन इस स्थिति में नहीं है कि अपनी सेना भेजकर या इसका इस्तेमाल करके किसी भी तरह से भारत पर दबाव बना सके। भारतीय सेना ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को विभिन्न जगहों पर रोक रखा है, इनमें याटुंग और फरी डजोंग शामिल हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट- डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन
कश्मीर फ्रंट पर आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में भारतीय सेना ने जिस तरह से कार्रवाई की इसमें डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट का रोल अहम रहा। चीन के खिलाफ भी अनिल भट्ट ने खुद को साबित किया। उन्होंने चौबीसों घंटे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर नजरें गड़ाए रखी। भारतीय सेना का वॉर रूम कई बार टॉप लीडरशिप को स्थिति की जानकारी मुहैया कराता था।

एस जयशंकर- विदेश सचिव
विदेश सचिव एस जयशंकर ने भी डोकलाम मामले पर चीन के रवैये में बदलाव को लेकर अहम रोल निभाया। उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए चीन से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद टालने की रणनीति बनाई और कूटनीतिक तौर पर इस समस्या का हल खोजने में सफल रहे। चीन की ओर से जारी बयानबाजी की परवाह नहीं करते हुए विदेश मंत्रालय ने शांत रुख अख्तियार किया। उन्होंने भूटान से रिश्ते संभालने में भी अहम रोल निभाया है।

विजय केशव गोखले- चीन में भारत के राजदूत
डोकलाम विवाद टालने में बीजिंग में भी भारत की ओर से खास कूटनीतिक प्रयास किए गए। इसकी तैयारी चीन में भारत के राजदूत विजय केशव गोखले ने की। उच्चस्तरीय सूत्रों की मानें तो उन्होंने अपने कूटनीतिक कौशल का इस्तेमाल करते हुए चीन को झूकने पर मजबूर किया। 1981 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) के रूप में लौटेंगे।












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