पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा कि मीडिया का आतंकियों का समर्थन

नई दिल्ली। आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कई जगह हिंसा भड़क गयी है। कश्मीर में समय समय पर इस तरह की समस्यायें मुंह उठाती रहती हैं इसकी बड़ी वजह है कि आजादी से पहले की गयी बड़ी गलती जिसमें अन्य राज्यों की तरह कश्मीर का भारत में विलय नहीं हो पाना।

Media supporting terrorists happens only in India: Former RAW official

बजाए कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय के इस मामले को यूएन ले जाा गया जहा यह मामला आज भी विवाद का विषय बना हुआ है। ऐसे में यह भारत की ऐतिहासिक भूल है जिसे इतिहास में ठीक किया जा सकता है। रॉ के पूर्व अधिकारी अमर भूषण का कहना है कि इस तरह की समस्यायें आती ही रहेंगी।

वन इंडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे हमें खुद लड़नी है, इसके लिए हम मतलबी देश अमेरिका पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। अमेरिका हाफिज सईद के खिलाफ कार्यवाही नहीं करता है क्योंकि वह उन्हें नहीं बल्कि भारत को नुकसान पहुंचाता है।

कश्मीर की मौजूदा समस्या पर आप क्या सोचते हैं?

मेरे पास इश मुद्दे पर कई सकारात्मक तथ्य हैं। सीमा को फिर से सुरक्षित किया गया है, घुसपैठ को लंबे समय से रोका गया है और सेना आये दिन आतंकियों को एक एक करके मार रही है। लेकिन जम्मू सरकार विकास के मामले में पीछे रह गयी है जोकि आने वाले समय में बड़ी समस्या बन सकती है।

बुरहान वानी की हत्या के बारे में आपका क्या कहना है?

वह एक जाना हुआ आतंकी था, समस्या यह है कि वह कई लोगों को अपने साथ जोड़ने में सफल हुआ। मिलिटैंट की समस्या यहां बढ़ती ही जा रही है। इसकी बड़ी वजह है कि पाकिस्तान को पता है कि पहले की तुलना में कश्मीर से काम करना उसके लिए काफी मुश्किल है। मेरा मानना है कि लोगों को ऐसी हत्याओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। हमें खुद को और तैयार करने की जरूरत है, इसके अलावा सीमा पर चौकसी को और तेज करना बेहद अहम है।

हिंसा के खिलाफ कैसे कार्यवाही करनी चाहिए?

जब स्थानीय कश्मीरी लोग हिंसा से प्रभावित होने लगेंगे तो हिंसा अपने आप खत्म हो जाएगी। सबसे पहले जरूरत है कि हम खुद की सुरक्षा को पुख्ता करें, आर्मी कैंप, पुलिस स्टेशन आदि को सुरक्षित करना अहम है। अगर वो पत्थर फेंकते हैं और खुद की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो सबसे ज्यादा यहां के लोगों को नुकसान होगा। ऐसे में अगर ये उपद्रवी अस्पताल, स्कूल को नुकसान पहुंचाते हैं तो स्थानीय लोगों को काफी समस्या उठानी पड़ेगी, ऐसी परिस्थिति आने पर हिंसा की घटनायें अपने आप ही खत्म हो जायेंगी।

क्या आपको लगता है कि पुलिस कर्मियों को भी प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकना चाहिए?

मैं इस बात से सहमत नहीं हूं, मुझे लगता है कि सेना को इजराइल की भांति काम करना चाहिए और नम बुलेट का इस्तेमाल करना चाहिए। यह बुलेट्स काफी प्रभावी होती हैं। प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकना किसी भी स्तर पर जायज नहीं है।

सरकार इन जगहों पर की गयी कवरेज से नाराज है, आपका क्या कहना है इस पर?

कुछ मीडियाकर्मियों द्वारा आतंकियों का समर्थन करना, ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ऐसे चैनलों को कुछ दिनों के लिए बंद कर देना चाहिए, जो आतंकियों को हीरो बनाने का काम करते हैं, या अलगाववादियों की मदद करते हैं। ऐसा करके उन्हें सबक सिखाया जा सकता है।

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