MDH मसाले वाले धर्मपाल गुलाटी लग्जरी कारों के भी थे शौकीन
क्यों करोगबाग में चप्पल उतार देते थे MDH मसाले वाले धर्मपाल गुलाटी
नई दिल्ली। एमडीएच मसाले कंपनी की स्थापना करने वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी का 98 साल की उम्र में निधन हो गया है। गुरुवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। टीवी पर एमडीएच के विज्ञापन से मसालों की दुनिया के बादशाह कहे जाने वाले बुजु्र्ग महाशय धर्मपाल गुलाटी को खूब शोहरत मिली। ना सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में उन्होंने पहचान बनाई। बंटवारे का दंश झेलते हुए पाकिस्तान से चलकर भार आने और फिर एक सफल बिजनेसमैन बनने तक धर्मपाल गुलाटी की जिंदगी में कई उतार-चढाव रहे। वहीं वो लग्जरी कारों के भी शौकीन थे।
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कारों का भी था शौक
धर्मपाल गुलाटी महंगी गाड़ियों के काफी शौकीन थे और उनके पास कई महंगी कारें थीं। वहीं एक और दिलचस्प बात उनके बारे में ये है कि दिल्ली के करोलबाग में उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजारा लेकिन लो हमेशा यहां नंगे पांव ही घूमते थे। इसकी वजह उन्होंने अपने एक दोस्त को बताते हुए कहा था कि करोल बाग में जब भी आता हूं तो जूते-चप्पल पहनकर नहीं घूमता। मेरे लिए करोल बाग मंदिर से कम नहीं है। इसी करोल बाग में खाली हाथ आया था। यहां पर रहते हुये ही मैंने कारोबारी जिंदगी में इतनी बुलंदियों को छूआ।

सियालकोट से आए थे करोलबाग
महाशय धर्मपाल गुलाटी के पिता महाशय चुन्नीलाल की सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में 'महाशय दी हट्टी' नाम से दुकान थी। इसी 'महाशय दी हट्टी' का शॉर्ट फॉर्म है- एमडीएच। धर्मपाल गुलाटी भी सियालकोट में ही जन्में थे और वहीं पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाते थे। भारत के बंटवारे के वक्त परिवार सियालकोट से दिल्ली के करोलबाग में आकर बसा था। करोगलबाग में भी उन्होंने दुकान के पुराने नाम को ही आगे बढ़ाया।

कुछ दिन तक तांगा भी चलाया
बंटवारे के बाद भारत आकर धर्मपाल गुलाटी दिल्ली के कुतुब रोड़ पर तांगा चलाते थे। कुछ दिन बाज उन्होंने मसालों को कूटकर बेचने लगे और वक्त के साथ उनका बिजनेस फैलता गया। कभी दिल्ली की गलियों में तांगा चलाने वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी ने एमडीएच कंपनी का 1500 करोड़ रूपए का साम्राज्य खड़ा किया। एमडीएच का कारोबार भारत के साथ-साथ यूरोप, जापान, अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब में भी है।

आखिरी वक्त तक भी रहे सक्रिय
महाशय धर्मपाल गुलाटी अपने आखिरी वक्त तक भी काफी सक्रिय थे। जब उनकी बढ़ती उम्र के साथ उनकी असीम ऊर्जा के बारे में पूछा जाता था तो बताते थे कि वह रोजाना सुबह के पौन पांच बजे उठ जाते हैं। सुबह सबसे पहले तांबे के गिलास में थोड़ी शहद के साथ पानी पीते हैं। इसके बाद पार्क में जाकर आसन-प्राणायाम और ठहलने का उनका वक्त फिक्स था। शाम को भी वो जरूर टहलते थे।












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