योगी के नये-नवेले मंत्री ने आखिर मायावती को क्यों कहा बिजली का नंगा तार?

योगी के नये-नवेले मंत्री ने मायावती को क्यों कहा बिजली का नंगा तार ?

नई दिल्ली। गिरिराज नाम ही काफी है सियासत में हलचल के लिए। एक गिरिराज बिहार में है तो दूसरे उत्तर प्रदेश में। बिहार के गिरिराज तो बयानों के लिए पहले से मशहूर रहे हैं, अब चर्चा में हैं उत्तर प्रदेश के गिरिराज। आगरा कैंट के भाजपा विधायक गिरिराज सिंह धर्मेश ने बसपा प्रमुख मायावती की तुलना बिजली के नंगे तार से की है। योगी सरकार के नये नवेले ये मंत्री मायावती को अवसरवादी बताने के जोश में होश खो बैठे और कह दिया कि वे किसी की सगी नहीं, वे बिजली का नंगा तार हैं, जो छुएगा वह मर जाएगा। पेशे से डॉक्टर धर्मेश खुद दलित समाज से आते हैं और आगरा कैंट सुरक्षित सीट से 2017 में पहली बार चुनाव जीते हैं। आखिर गिरिराज सिंह धर्मेश ने ऐसी विवादास्पद बात क्यों कही ?

क्या मायावती से मेल का मतलब मौत ?

क्या मायावती से मेल का मतलब मौत ?

धारा 370 के मुद्दे पर मायावती ने सबको हैरान करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। इतना ही नहीं वे विपक्षी नेताओं को कश्मीर नहीं जाने की सलाह दे रही हैं ताकि वहां अमन चैन बना रहे। अल्पसंख्यक हितों की राजनीति करने वाली मायावती के इस रवैये ने सबको हैरत में डाल दिया है। मंत्री बनने के बाद गिरिराज सिंह धर्मेश आगरा पहुंचे थे। पत्रकारों ने बातचीत में जब उनसे मायावती की इस मेहरबानी की वजह पूछी तो उन्होंने बिजली के तार वाला बयान दे डाला। दरअसर धर्मेश ये कहना चाहते थे कि मायावती की मेहरबानी एक धोखा है। इस धोखे में जो उनसे तालमेल करेगा उसका खात्मा हो जाएगा। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के हस्र का उदाहरण दिया। मायावती कैसे सपा का साथ लेकर जीरो से दस पर पहुंच गयी जब कि सपा पांच के पांच पर ही अटकी रही। मायावती का मतलब सध गया तो सपा को ठोकर मार दी। अखिलेश का मायावती से मेल आत्मघाती साबित हुआ। भाजपा ने भी मायावती को तीन बार मुख्यमंत्री बनाया था। क्या नतीजा हुआ ? धर्मेश ने कहा कि मायावती किसी की सगी नहीं हैं, वे बिजली का नंगा तार हैं, जिसने छुआ वो मरा।

क्यों मेहरबान हैं मायावती ?

क्यों मेहरबान हैं मायावती ?

जो भाजपा मायावती को फूंटी आंख नहीं सुहाती थी अब वे उस पर मेहरबान क्यों हो गयी हैं ? धर्मेश ने इस सवाल का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मायावती अपनी बेहिसाब दौलत की जांच से डरी हुई हैं। उन्होंने जिस तरह से ये पैसा जमा किया है उसके जब्त होने का खतरा है। उनके भाई आनंद कुमार की जमीन जब्त हो चुकी है। विपरित परिस्थितियों को देख कर मायवाती ने अपने सुर बदल दिये हैं। भाजपा के प्रति नरमी दिखा कर भी मायावती को कोई फायदा नहीं मिलेगा क्यों कि जांच एजेसिंया कानून के हिसाब से काम कर रही हैं। यह मायावती की मतलबपरस्ती है कि वे ऐसा सोच रही हैं।

कांशीराम की मौत पर सवाल

कांशीराम की मौत पर सवाल

धर्मेश ने बसपा के संस्थापक कांशीराम की मौत को संदेहास्पद बताया है और इसकी सीबीआइ जांच की मांग की है। कांशीराम की 2006 में मौत हुई थी। कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर ने उस समय आरोप लगाया था कि उनके भाई की मौत के लिए मायावती जिम्मेवार हैं। स्वर्ण कौर के मुताबिक, कांशीराम तीन साल से बीमार थे। एक साल से उनकी जुबान बंद हो गयी थी। वे कुछ बोल नहीं पाते थे। तब स्वर्ण कौर मे मायावती पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। जब कांशीराम की बूढ़ी मां अपने बीमार बेटे से मिलने के लिए आयी तो मायावती ने मिलने नहीं दिया था। स्वर्ण कौर ने आरोप लगाया था कि जब 2003 में उनके भाई कांशीराम बीमार रहने लगे थे तब मायावती ने उन पर दबाव डाल कर अध्यक्ष पद हथिया लिया था। अब धर्मेश ने आरोप लगाया है कि जिस कांशीराम ने मायावती को आगे बढ़ाया और मुख्यमंत्री बनाया वे उनके प्रति भी निष्ठावान नहीं रहीं। इस लिए कांशीराम की मौत की जांच होनी चाहिए।

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