मेरे बेटे की शहादत का अपमान मत करिए... सरकार ने कूरियर से भेजा शौर्य चक्र, शहीद के पिता ने ठुकराया
अहमदाबाद, 08 सितंबर: गुजरात के अहमदाबाद से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर आई है। साल 2017 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान राष्ट्रीय राइफल्स के लांस नायक गोपाल सिंह शहीद को सरकार ने कुरियर की मदद से शौर्य चक्र भेज सम्मानित किया। गुस्साए परिजन नो ना सिर्फ सरकार को खरी-खोटी सुनाई बल्किन शौर्य चक्र को भी वापस लौटा दिया।

2017 में गोपाल शहीद हो गए थे
फरवरी 2017 में कश्मीर के कुलगाम जिले ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में गोपाल सिंह शहीद हो गए थे। एक साल बाद उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित करने का फैसला किया गया जो देश में अशोक चक्र और कीर्ति चक्र के बाद तीसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। जिस वक्त गोपाल सिंह शहीद हुए उस दौरान उनके और उनकी पत्नी के बीच अनबन चल रही थी।

पत्नी के साथ चल रही थी तलाक की प्रक्रिया
दरअसल लांस नायक गोपाल सिंह की शादी 2007 में हेमावती से हुई थी लेकिन किसी मतभेद के चलते वे अपनी पत्नी से 2011 में अलग रह रहे थे। दोनों के व्यस्त रहने के कारण साल 2013 में अदालत ने शादी तोड़ने की याचिका भी खारिज कर दी थी। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सैनिक के माता-पिता और उसकी पत्नी के बीच कई वर्षों तक कोई संपर्क नहीं था।

परिवारिक विवाद के चलते नहीं मिल पाया था शौर्य चक्र
वहीं भदौरिया ने पत्नी को किसी भी सेवा लाभ के अनुदान पर आपत्ति जताई थी और शहर की एक सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि जब 2017 में गोपाल सिंह शहीद हो गए तो 2018 में उन्हें शौर्य चक्र के लिए चुना गया। फिर 2018 के बाद दोनों परिवारों के बीच सुलह कराने की कोशिश की गई जो कि 2020 तक नहीं सुलझ पाया।

2020 में हुआ कोर्ट में फैसला
वहीं भदौरिया ने पत्नी को किसी भी सेवा लाभ के अनुदान पर आपत्ति जताई थी और शहर की एक सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि जब 2017 में गोपाल सिंह शहीद हो गए तो 2018 में उन्हें शौर्य चक्र के लिए चुना गया। फिर 2018 के बाद दोनों परिवारों के बीच सुलह कराने की कोशिश की गई जो कि 2020 तक नहीं सुलझ पाया।
इसके बाद सितंबर, 2021 में, शहीद की पूर्व पत्नी और माता-पिता के बीच कोर्ट के जरिए एक समझौता करवाया गया।अदालत ने आदेश दिया कि केंद्र सरकार के अधिकारी गोपाल सिंह को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार और माता-पिता को पुरस्कार से जुड़े सभी लाभ प्रदान किए जाएं। सिटी सिविल कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दोनों पक्षों को पेंशन और अनुग्रह भुगतान सहित सेवा लाभों का एक समान हिस्सा मिलता है।

परिवार नें वापस किया शौर्य चक्र
विवाद जब सुलझा तो ये शौर्य पदक कूरियर के जरिए भेज दिया गया। जिसे लेकर उनका परिवार नाराज हो गया। गोपाल के माता-पिता ने अब राष्ट्रपति से सम्मान की मांग करते हुए वीरता पदक लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा- "हम कूरियर द्वारा शौर्य चक्र स्वीकार नहीं करेंगे। इसे राष्ट्रपति द्वारा प्रोटोकॉल के अनुसार प्रदान किया जाना चाहिए। हमें 5 सितंबर को शाम 5 बजे एक पार्सल मिला, जिस पर वीरता पुरस्कार का लेबल था। मैंने पार्सल नहीं खोला और तुरंत लौटा दिया।

सरकार से रखी ये मांग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार परिवार वाले अब राष्ट्रपति भवन जाएंगे और सबके सामने राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित करने की मांग करेंगे। परिवार वालों का कहना है कि उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी और सरकार ने उसकी शहादत का ये सिला दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई गुप्त रखने की चीज थोड़ी है जो आप इसे चुपचाप दे रहे हैं। मेरे बेटे ने देश के लिए बलिदान दिया है इसलिए उसे देश के सामने ही सम्मान मिलना चाहिए। शहीद के पिता का कहना है कि मैं इसे कोई मुद्दा नहीं बनाना चाहता। लेकिन मैं सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर अनुरोध करूंगा कि राष्ट्रपति के हाथों मेरे बेटे को मिलने वाला यह पदक मुझे सौंपा जाए।












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