बलात्कार से बचने के लिए मार्शल आर्ट काफी नहीं अखिलेश जी!

पिछले कुछ दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश में हुए बलात्कार या फिर सामूहिक बलात्कारों पर अगर एक नजर डाली जाए तो पता चलेगा कि दलित लड़कियों को ही सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया। ऐसे दलित जिन्हें न तो स्कूल से कोई मतलब है और न ही मार्शल आर्ट से। आम जन भी यही कहते हैं कि जो दलित लड़कियां गांवों में बलात्कार को शिकार हो रही हैं वे सभी मार्शल आर्ट सीखने के लिए होने वाले खर्च को वहन नहीं कर सकती हैं।
ऐसा कतई नहीं है कि उत्तर प्रदेश के स्कूलों में मार्याल आर्ट या फिर आत्मरक्षा के गुण नहीं सिखाए जाते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश को शायद यह नहीं पता कि इससे पहले भी आत्मरक्षा के गुण दिए जाते रहे हैं लेकिन उसका कोई असर दलित परिवार की लड़कियों में देखने को नहीं मिलता है और वही इस घटना का शिकार भी होती हैं। जिन दलितों के पास स्कूल जाने और खाना खाने के पैसे भी नहीं है वो भला मार्शल आर्ट कैसे सीखेंगी?
हाल ही में किए गए एक सर्वे से यह भी ज्ञात हुआ है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। यही नहीं उत्तर प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की भी कमी है जो मार्शल आर्ट जैसे गुण बच्चों को प्रदान करते हों। इस हालात में अखिलेश सिह यादव भला कैसे कह सकते हैं कि स्कूलों में मार्शल आर्ट सिखाया जाएगा। अन्य की भांति यह आदेश भी सचिवालय के कूड़ाघर में ही कुछ दिनों बाद देखने को मिलेगा।












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