आखिर कैसे भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो गगनयान मिशन में करेंगे ISRO की मदद?
गगनयान मिशन में इसरो की मदद भारतीय नौसेना कर रही। उसके मार्कोस कमांडो लैंडिंग के बाद मॉड्यूल की रिकवरी में मदद करेंगे।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन पर तेजी से काम कर रहा। जिसके तहत इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। ये भारत का पहला मानवयुक्त स्पेस मिशन है, ऐसे में इसकी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। अब भारतीय नौसेना के साथ इसरो का एक समझौता हुआ है।
भारतीय नौसेना के कमांडो 'मार्कोस' इस मिशन में इसरो की मदद करेंगे। उनके लिए ट्रेनिंग प्लान रिलीज कर दिया गया है, लेकिन लोगों को ये नहीं समझ आ रहा कि आखिर स्पेस मिशन में कमांडोज का क्या काम? तो आइए जानते हैं इसकी वजह-
इसरो तीन अंतरिक्ष यात्रियों को तीन दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजेगा। ये यान करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई के ऑर्बिट में चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर आएगा। इसकी लैंडिंग पानी में होगी, ऐसे में यान को खोजकर निकालना एक बड़ा टास्क है। इस वजह से भारतीय नौसेना की मदद ली जा रही है।
इसरो के निवेदन पर भारतीय नौसेना ने एक रिकवरी टीम तैयार की है। जिसमें गोताखोर, मार्कोस कमांडो, चिकित्सा विशेषज्ञ, कम्यूनिकेटर, टेक्नीशियन और नौसेना के एविएटर शामिल हैं।
हाल ही में नौसेना और इसरो में इसको लेकर समझौता हुआ। जिसके बाद नौसेना ने तैयारी तेज कर दी है। उसे स्पेस एजेंसी ने क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल भी सौंपा है, ताकि वो उसके साथ ट्रेनिंग कर सकें। ये मॉडल एकदम गगनयान के साइज और भार का है।
समुद्र में मार्केस कमांडोज को ऑपरेशन का काफी अच्छा अनुभव है। वो विशेष वोट के जरिए कैप्सूल को रिकवर करेंगे और उसको सुरक्षित इसरो की टीम तक पहुंचाएंगे।
कब लॉन्च होगा गगनयान मिशन?
इसरो के मुताबिक 2024 की चौथी तिमाही में इस मिशन को लॉन्च करने की योजना है। कोरोना महामारी की वजह से इसमें थोड़ी देरी हो गई। इसरो सबसे ज्यादा फोकस चालक दल की सुरक्षा पर कर रहा। उनको रूस भेज गया था, जहां वो ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। इसके बाद भारत में उनकी अगले चरण की ट्रेनिंग हो रही। गगनयान मिशन में जुड़े सभी क्रू भारतीय वायुसेना के पायलट हैं। जिनको अलग-अलग लेवल के टेस्ट के बाद चुना गया।












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