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Maratha reservation: महाराष्ट्र में EWS कोटा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं मराठा, जानिए कितना मिला है फायदा?

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र का माहौल गर्म हो चुका है और आंदोलन हिंसक होती जा रही है। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS)के लिए जो कोटा उपलब्ध है, उसका सबसे फायदा राज्य में इसी वर्ग को मिला है।

महाराष्ट्र में सरकारी जॉब और शिक्षण संस्थानों में EWS कोटे के तहत जिस वर्ग को सबसे ज्यादा लाभ मिला है, उसमें अधिकतर मराठा समाज के लोग ही शामिल हैं। केंद्र सरकार ने 2019 में उन वर्गों के लिए EWS कोटे की सुविधा शुरू की थी, जिन्हें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के तहत मिलने वाले आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। जबकि, वे आर्थिक तौर पर बहुत ही गरीब हैं।

maratha and ews quota

EWS कोटे का सबसे बड़ा लाभार्थी मराठा समाज
EWS कोटे के तहत 10% आरक्षण की सुविधा है। यह सामान्य वर्ग के उन लोगों को मिलता है, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है। साल 2021 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में मराठा आरक्षण के फैसले को खारिज कर दिया था, तो राज्य सरकार ने इस समुदाय को EWS के तहत मिलने वाला आरक्षण का लाभ देना शुरू किया था।

10% EWS आरक्षण में ज्यादातर पर मराठा समाज का हो रहा है कब्जा
अगर 2022 में राज्य में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के तहत शिक्षण संस्थानों में दाखिले का डेटा देखें तो EWS कोटे के तहते जितने उम्मीदवारों का चयन हुआ, उसमें से अकेले 78.6% मराठा समुदाय के लोग थे। यानी कुल हुए 20,117 नामांकनों में 15,807 मराठा समुदाय के थे और सिर्फ 4,310 लोग ही सामान्य वर्ग के अन्य समाज से थे।

यह ट्रेंड मौजूदा साल 2023 में भी बरकरार है। CET के माध्यम से इस साल जो कुल 11,302 दाखिले हुए हैं, उनमें से 8,664 यानी 76.7% अकेले मराठा समाज के हैं। जबकि, सामान्य वर्ग के अन्य समाज के सिर्फ 2,638 उम्मीदवारों का दाखिला EWS कोटे के तहत मिला है, जो कि महज 23.3% है। ये आंकड़े मराठा आरक्षण पर राज्य की कैबिनेट उप-समिति के सामने रखे गए थे।

सरकारी नौकरियों में भी EWS कोटे में अधिकतर नौकरी मराठा समुदाय को
इसी तरह महाराष्ट्र में साल 2019 और 2022 में सरकारी नौकरियों में भी EWS कोटा के मामले में मराठा समाज को सबसे ज्यादा मलाई काटने का मौका मिला है। आंकड़े बतातें है कि इस अवधि में EWS कोटे के तहत उपलब्ध 84.3% सरकारी नौकरियां अकेले मराठा समाज को मिली हैं।

2019 और 2022 में MPSC के माध्यम से 650 सरकारी नौकरियां EWS कोटे वाले लोगों को मिलीं। इनमें से 548 नौकरियां सिर्फ मराठा समाज के लोगों को मिलीं। जबकि, सामान्य वर्ग के अन्य समाज के लोगों की संख्या मात्र 102 रही।

लेकिन, मराठा आरक्षण की मांग करने वाले समाज के नेता EWS कोटे से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उनके मुताबिक इसमें उनकी प्रतियोगिता अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से है। इसलिए वे चाहते हैं कि उनके लिए अलग से कोटे की व्यवस्था हो, ताकि निर्धारित कोटे का पूरा लाभ उनके समाज को मिल सके।

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