2017 में माओवादियों के हमले में आई अब तक की सबसे बड़ी कमी
नई दिल्ली। पिछले एक दशक में पहली बार ऐसा है जब देश में लेफ्ट विंग के आतंकियों के हमले कम हुए और ये 1000 से नीचे रहे। गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि माओवादियों के हमले में पिछले वर्ष कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इन हमलों की संख्या में कमी आई है इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि माओवादियों का मनोबल कम हुआ हो या फिर वह जानबूझकर कम सक्रिय हुए हैं।

सबसे अधिक छत्तीसगढ़ व झारखंड में हुई घटनाएं
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 15 दिसंबर तक कुल 851 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2016 में यह संख्या 1016 थी। इस लिहाज से इस वर्ष माओवादियों के हमले में कमी आई है। 15 दिसंबर 2016 तक कुल 1016 माओवादी हमले हुए थे जबकि 2016 में कुल 1048 हमले हुए थे। यह हमले 10 अलग-अलग माओवाद से प्रभावित राज्यों में हुए थे। सबसे अधिक हमले 2009 में हुए थे, इस वर्ष कुल 2258 हमले हुए थे ,सबसे अधिक हमले छत्तीसगढ़ में 353 व झारखंड में 240 थे।
खास रणनीति हो सकती है
गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के. विजय कुमार ने बताया कि इसकी एक वजह यह है कि युवा अब माओवाद की ओर ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं, जिसकी वजह से माओवादियों के कैडर में कमी आई है। जिस तरह से उन्हें आसानी से कैडेट मिल रहे थे, उसमे अब 50 फीसदी की कमी आई है। वहीं इन हमलों में आई कमी के पीछे खास रणनीति हो सकती है।
भरोसा कम हुआ है
विजय कुमार ने बताया कि जिस तरह से हाल के कुछ दिनों में कई माओ नेताओं के पास पैसे के लेनदेन के मामले सामने आए और फिरौती की खबरें सामने आई, वह भी एक बड़ी वजह हो सकती है कि इन घटनाओं में कमी आई है। वर्ष 2004 मे जब तमाम माओवादी संगठन एक जुट हुए तो उन्होंने कई हमलों को अंजाम दिया, 2010 तक इनके हमलों की संख्या बढ़ती रही लेकिन अब यह कम हो रही है।
सेना ने गिराया मनोबल
गौरतलब है कि बीएसएफ ने एंटी माओइस्ट ऑपरेशन चलाया तो सीआरपीएफ ने ओडिशा व छत्तीसगढ़ के चार ठिकानों में नए बेस को बनाया, जिसके चलते माओवादियों के मनोबल में कमी आई। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि वरिष्ठ माओ नेताओं की उम्र हो रही है, जबकि कुछ की तबियत काफी खराब हुई है, यह भी एक बड़ी वजह है इन हमलों के कम होने की।












Click it and Unblock the Notifications