Manipur Violence: 'मणिपुर में आर्मी की हो तैनाती, राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं', जनजातीय मंच की SC से अपील
मणिपुर में हिंसा के मद्देनजर जनजातीय सुरक्षा मंच ने सुप्रीम कोर्ट से राज्य में आर्मी की तैनाती की मांग की है। जनजातीय मंच ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं है इसलिए जल्द से जल्द राज्य में सेना की तैनाती की मांग की है। जनजातीय मंच के सदस्यों ने कहा कि वे केंद्र और राज्य सरकारों के झूठे आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे।
जनजातीय मंच ने सुप्रीम कोर्ट से चुराचनपुर, चंदेल, कांगपोकपी, इंफाल पूर्व और इंफाल जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण रखने के लिए भारतीय सेना को दिशा-निर्देश पारित करने की मांग की। जनजातीय मंच ने गौहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा के नेतृत्व में केंद्र द्वारा गठित जांच आयोग में विश्वास नहीं जताया और आग्रह किया कि इसे रद्द कर दिया जाए और दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और विधि आयोग वाले एकल सदस्यीय आयोग का गठन किया जाए।

जनजातीय मंच ने रखी यह मांग
असम के पूर्व पुलिस प्रमुख हरेकृष्ण डेका की अध्यक्षता में एक एसआईटी के गठन और तीन महीने के भीतर मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को दो करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की मांग की। आवेदन में मृतक परिवारों के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है।
मैतेई और कूकी समुदाय की सालों पुरानी दुश्मनी
मणिपुर पहली बार ऐसी हिंसा नहीं देख रहा है। इससे पहले भी राज्य में कई बार हिंसा भड़की है। वहीं मौतेई और कूकी समुदाय के बीच की दुश्मनी सालों पुरानी है। मैतई समुदाय की मणिपुर की बड़ी आबादी है। कूकी को डर है कि, अगर मैतेई समुदाय को एसटी वर्ग का दर्जा मिला तो वह आदिवासियों के लिए आरक्षित जंगल और जमीनों पर कब्जा कर लेंगे। कूकी आदिवासी समुदाय को आरक्षित वन भूमि से बेदखल करने को लेकर पहले भी हिंसक झड़पें हुई हैं, जिसके कारण राज्य में छोटे-बड़े आंदोलन होते रहे हैं।












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