Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा के बीच सभी ट्रेनों का संचालन रोका गया
Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा के चलते सभी ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। नॉर्थ फ्रंट रेलवे ने जबतक कानून व्यवस्था सही नहीं हो जाती है ट्रेनों का संचालन रोकने का फैसला लिया है।

मणिपुर में जिस तरह से हिंसा फैली है और कानून-व्यवस्था पर बिगड़ी हुई उसको देखते हुए भारतीय रेलवे ने मणिपुर जाने वाली सभी ट्रेनों के संचालन को रोक दिया है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने मणिपुर की ओर जाने वाली सभी ट्रेनों को रोक गिया है।
नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ सब्यसाची डे ने बताया कि जबतक हालात बेहतर नहीं हो जाते हैं मणिपुर में एक भी ट्रेन नहीं चलेगी। मणिपुर सरकार की ओर सलाह दिए जाने के बाद यह फैसला लिया गया है। भारतीय रेलवे की ओर से कहा गया है कि 4 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। शुरुआत में यह फैसला सिर्फ 5-6 मई के लिए लिया गया है।
इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि कई परिवार जो मणिपुर हिंसा से प्रभावित हैं, उन्होंने असम में शरण मांगी है, मैंने काचर के जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि इन परिवारों का खयाल रखें। मैं लगातार मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से संपर्क में हूं, मैने इस मुश्किल समय में हर तरह की मदद का भरोसा असम की ओर से दिया है।
मणिपुर की राजधानी इंफाल में भड़की हिंसा के बीच सरकार ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है। हिंसा पर काबू पाने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। आरएएफ की टीम को भी यहां भेजा जा रहा है।
आरएएफ के 500 जवानों को इंफाल भेजा जा रहा है। ये सभी जवान सेना, असम राइफल्स, सीआरपीएफ और प्रदेश पुलिस की मदद करेंगे। बुधवार को भड़की हिंसा को संभालने में सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्र सरकार की मणिपुर हिंसा पर नजर है। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने इसको लेकर दो अहम बैठक की और मणिपुर के मुख्यमंत्री और पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्री से बात की है।हिंसा के बीच 9000 से अधिक लोगों को यहां से बाहर निकाला जा चुका है। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि 5000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि 2000 अन्य लोगों को इंफाल की घाटी में शिफ्ट किया गया है।
इंफाल में मणिपुर कोर्ट के फैसले के बाद आदिविसायों प्रदर्शन करना शुरू कर दिया, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। दरअसल मणिपुर हाई कोर्ट ने गैर आदिवासी मीटीस को शेड्यूल ट्राइब की लिस्ट में शामिल करने का आदेश दिया था जिससे नागा और कुकी आदिवासी समाज के लोग नाराज हैं। प्रदेश में इनकी आबादी 40 फीसदी है।












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