Mandi Chunav: कंगना या विक्रमादित्य? मंडी में कौन मारेगा बाजी? क्वीन की होगी जीत या फिर जीतेगा 'राजा' का बेटा
Mandi Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण यानी सातवें चरण में 01 जून को मतदान होने हैं। इस चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटें हैं। एक सीट जिसकी चर्चा खूब है, वो है हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट।
मंडी सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अभिनेत्री कंगना रनौत को उम्मीदवार बनाया है। वहीं उनका मुकाबला हिमाचल प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री और मंडी लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह से है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड क्वीन कंगना जीतेंगी या 'राजा' का बेटा कहे जाने वाले विक्रमादित्य सिंह बाजी मारेंगे?

कंगना रनौत पहली बार चुनाव लड़ रहीं हैं। वहीं विक्रमादित्य सिंह हिमाचल की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाते हैं। वह वहां के जमीन से जुड़े नेता हैं। इसलिए मंडी में कंगना रनौत के लिए चुनौती बहुत बड़ी है।
लेकिन कंगना जिस तरह से पिछले महीने से चुनाव प्रचार में जुटी हैं और उनकी रैलियों में जिस तरह का जनसमर्थन देखने को मिल रहा है, उसे देखकर ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंडी लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर है।
Mandi Election 2024: मंडी लोकसभा सीट पर किसका रहा है दबदबा?
मंडी लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पैतृक सीट है। कांग्रेस ने 1952 से अब तक 12 बार यह सीट जीती है। वीरभद्र के परिवार के सदस्यों ने ही छह बार इस सीट पर कब्जा किया है। विक्रमादित्य की मां प्रतिभा सिंह मौजूदा सांसद हैं। इस सीट पर विक्रमादित्य सिंह के परिवार का दबदबा रहा है।
इसके विपरीत कंगना रनौत के पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और नाही उनके परिवार से कोई राजनीति से जुड़ा है। नाही कंगना के पास कोई वफदार समर्थकों की कोई फौज है। कंगना के पास जो भी टीम है, उसे अभी भी नए नेता और उनके साथ तालमेल बिठाकर काम करना पड़ रहा है।

लेकिन मंडी में विक्रमादित्य के परिवार के दबदबे की वजह से कंगना रनौत को कम आंका नहीं जा सकता है। कंगना रनौत को मंडी से उतारकर भाजपा ने बड़ा दांव खेला है।
अगर मोदी मैजिक काम आया तो कंगना के वहां से जीतने की भी उम्मीद है। कंगना रनौत पर भाजपा को कितना भरोसा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कंगना के लिए रैली करने वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक गए थे। भाजपा के कई दिग्गज नेता मंडी में कंगना के लिए वोट मांगते दिखे हैं।

दूसरी तरह विक्रमादित्य सिंह को यहां का बेटा कहा जाता है, इलाके में वो ''टिक्का साहब'' के नाम से मशहूर हैं। विक्रमादित्य सिंह की कुछ चुनावी रैली में भी जनसैलाब भी देखा गया है। उनकी रैली में सड़कों पर ''राजा का बेटा जीतेगा'' के नारे सुनाई देते हैं।
राजघराने के वीरभद्र की इस क्षेत्र में इतनी गहरी पैठ थी और है भी। उनकी मृत्यु के बाद कांग्रेस ने 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा, तो नारा था 'वीरभद्र जीतेगा''। देश भर में कई जगहों पर कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर हुआ है, लेकिन हिमाचल में वीरभद्र परिवार का राज अभी भी कायम है। दो बार विधायक रह चुके विक्रमादित्य खुद मौजूदा कांग्रेस सरकार में मंत्री हैं।

कंगना रनौत को मिल रहा है महिलाओं का साथ
कई मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कंगना रनौत को मंडी की महिलाओं का साथ मिल रहा है। कंगना के चुनावी मैदान में उतरने से वहां की लड़कियों में एक जोश है। महिलाएं कंगना के समर्थन में दिख रही हैं।
महिलाओं का मानना है कि कंगना रनौत अगर मंडी से जीतती हैं तो वह महिलाओं के विकास के लिए कुछ बड़ा कदम उठा सकती है। वहीं भाजपा के दिग्गज नेता भी कंगना के लिए चुनाव प्रचार करते वक्त उनके संघर्ष और एक सफल महिला बनने की कहानी बता रहे हैं।

kangana ranaut VS vikramaditya singh: मंडी में किसका पलड़ा भारी?
पारंपरिक राजनीति के हिसाब से देखें, तो मंडी सीट पर विक्रमादित्य सिंह का पलड़ा भारी दिख रहा है। उनका पारिवारिक वर्चस्व उनका साथ दे सकता है। लेकिन दूसरी ओर कंगना रनौत की आवाज में जोश है, उनके कदमों में आगे बढ़ने की ताकत है और उनके हाव-भाव में एक प्रामाणिक पहाड़ी मासूमियत है। कांग्रेस उनके बॉलीवुड अतीत पर हमला करती है, लेकिन कंगना रनौत ने अपने बॉम्बे करियर को पीछे छोड़ दिया है और अपनी हिमाचली पहचान को ढाल बनाकर इस चुनाव में आगे बढ़ रही हैं।
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