हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार न पैदा करे ममता सरकार: हाईकोर्ट
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कोलकाता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार सिर्फ कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पर राज्य के लोगों की धार्मिक प्रैक्टिस करने की आजादी को छीन नहीं सकती। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी मुहर्रम के दिन दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगाए जाने के ममता बनर्जी के फैसले पर दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान कही।

न्यायाधीश राकेश तिवारी ने याचिका की सुनावई करते हुए, 'दोनों समुदायों (हिंदू और मुस्लिम) को सौहार्दपूर्वक रहने दीजिए। दोनों के बीच अतंर पैदा करने की कोशिश मत कीजिए।' बता दें कि ममता बनर्जी ने आदेश दिया था कि 1 अक्टूबर को मुहर्रम के दिन बंगाल में दशहरे में लगी दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक रहेगा।
ममता बनर्जी के इस फैसले के खिलाफ दाखिल तीन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पांच जजों की बेंच ने कहा कि दशहरा और मुहर्रम एक दिन के अंतर पर पड़ रहा है ऐसे में सिर्फ इसे ही आधार बनाकर कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जता मूर्तियों के विसर्जन पर रोक नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को सभी निवासियों को, चाहें वो किसी भी समुदाय को हों, को अपने धर्म को मानने और उसके प्रैक्टिस करने की आजादी है। सरकार बिना किसी ठोस वजह के इस आजादी पर रोक नहीं लगा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था प्रशासनिक मामला है। प्रशासन को कानून व्यव्स्था को ध्यान में रखते हुए तजिया निकालने और दुर्गा प्रतिमाओं के रास्तों को तय करने पर ध्यान देना चाहिए, ना कि नागरिकों की धार्मिक आजादी पर रोक लगाने का काम करना चाहिए। हाईकोर्ट इस मामले में गुरुवार को फैसला सुनाएगा।












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