PSE सर्वे: पश्चिम बंगाल में ममता और ओडिशा में पटनायक का जादू बरकरार, लेकिन PM के लिए मोदी ही मजबूत दावेदार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी के बीच लड़ाई जारी है और हिंसा के लिए दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाती आई है। इंडिया टुडे का पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचैंज (पीएसई) सर्वे के मुताबिक, 46 फीसदी जनता ने माना है कि ममता बनर्जी को अमित शाह की रैली में बाधा पहुंचाना को कोई अधिकार नहीं था। इस पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सिर्फ 26 फीसदी जनता ही बीजेपी की रथ को रोके जाने के फैसले से सहमत है, वहीं ज्यादातर लोग इसे सही मान रहे हैं। बता दें कि रथयात्रा की इजाजत नहीं मिलने के बाद बीजेपी ने अपनी रथयात्रा वाली रणनीति को रैलियों और चुनावी भाषणों में बदल दिया है। पिछले महीने 19 जनवरी को अमित शाह ने मालदा से अपनी चुनावी रैली की शुरुआत की थी।

पश्चिम बंगाल में CM ममता, PM मोदी

पश्चिम बंगाल में CM ममता, PM मोदी

इस सर्वे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की जनता अपनी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कामकाज से फिलहाल खुश है। सर्वे की मानें तो 46 फीसदी लोगों का कहना है कि वे ममता बनर्जी के कार्याकल से सहमत है। वहीं, 22 फीसदी लोग टीएमसी के काम काज से नाराज है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल ममता दीदी का जादू कायम है। पश्चिम बंगाल की 54 फीसदी जनता अभी भी ममता बनर्जी को अपनी सीएम के रूप में देखना चाह रही है। हालांकि, ममता भले ही अपने राज्य में लोकप्रिय है, लेकिन वह मोदी का जादू कम नहीं कर पाई है। इस सर्वे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की 49 फीसदी जनता मोदी को ही पीएम के रूप में देखना चाह रही है। वहीं, 25 फीसदी लोग चाहते हैं कि ममता को पीएम बनना चाहिए। हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सिर्फ 15 फीसदी जनता ही उन्हें देश का पीएम के रूप में देखती है। कांग्रेस भले ही राफेल को लेकर सरकार पर हमलावर है, लेकिन पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में 60 फीसदी लोग अभी भी राफेल विवाद को समझ नहीं पाए हैं। पश्चिम बंगाल में 30 फीसदी लोग बेरोजगारी, 26 फीसदी पीने का पानी और 18 फीसदी लोगों ने कृषि संकट जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। यह सर्वे 20 से जनवरी के बीच करवाया गया था।

ओडिशा में भी पीएम के लिए मोदी आगे

ओडिशा में भी पीएम के लिए मोदी आगे

ओडिशा में 2000 से सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पिछले चार महीनों में अपनी लोकप्रियता खोई है, लेकिन इसके बावजूद भी वे राज्य के सबसे पसंदीदा नेता में से एक है।
जनवरी के आंकड़ों में लगभग 52 प्रतिशत लोग अपने राज्य के अगले सीएम के रूप में पटनायक का समर्थन करेंगे। वहीं, ओडिशा के लोगों को जब पीएम के बारे में पूछा गया, तो 58 फीसदी लोग अभी भी मोदी के साथ खड़े हैं। इस सर्वे के मुताबिक, ओडिशा में पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार चढ़ता ही जा रहा है।
ओडिशा में 2000 से सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पिछले चार महीनों में अपनी लोकप्रियता खोई है, लेकिन इसके बावजूद भी वे राज्य के सबसे पसंदीदा नेता में से एक है। जनवरी के आंकड़ों में लगभग 52 प्रतिशत लोग अपने राज्य के अगले सीएम के रूप में पटनायक का समर्थन करेंगे। वहीं, ओडिशा के लोगों को जब पीएम के बारे में पूछा गया, तो 58 फीसदी लोग अभी भी मोदी के साथ खड़े हैं। इस सर्वे के मुताबिक, ओडिशा में पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार चढ़ता ही जा रहा है।

बंगाल और ओडिशा में छाप छोड़ने में राहुल नाकाम

बंगाल और ओडिशा में छाप छोड़ने में राहुल नाकाम

पटनायक की बीजेडी भाजपा की पूर्व सहयोगी है। 2008 के कंधमाल सांप्रदायिक दंगों के बाद सीएम पटनायक ने बीजेपी से अपने आपको अलग कर दिया था। वर्तमान में कुल 147 सीटों में से सत्तारूढ़ बीजेडी के पास 117 सीटें हैं और उसके बाद कांग्रेस पार्टी की 16 और भाजपा की 10 विधानसभा सीटें हैं। ओडिशा के सिर्फ 20 फीसदी लोग ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पीएम के रूप में देखना चाहते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सिर्फ 15 फीसदी जनता ही उन्हें देश का पीएम के रूप में देखती है।

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