'अंधेरे रूम में बेल्ट से पिटाई, नीले पड़े हाथ-पैर, नंगा कर लटकाने की धमकी'- साध्वी प्रज्ञा की जेल यातनाएं
Sadhvi Pragya Jail Torture: 31 जुलाई 2025 को मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने मालेगांव बम विस्फोट 2008 केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले ने 17 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले को खत्म कर दिया, जिसमें 6 लोगों की मौत और 95 लोग घायल हुए थे।
लेकिन इस फैसले से ज्यादा चर्चा में हैं साध्वी प्रज्ञा की जेल में बिताए 9 सालों की यातनाएं, जिनके खौफनाक खुलासों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। अंधेरे कमरे में बेल्ट से पिटाई, नंगा कर लटकाने की धमकी और कैंसर तक की वजह-आइए, साध्वी की जुबानी जानते हैं उनकी रूह कंपा देने वाली कहानी...

Malegaon Blast (मालेगांव विस्फोट): क्या था मामला?
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में रमजान के दौरान मस्जिद के पास अंजुमन चौक पर एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ। इस विस्फोट में 6 लोग मारे गए और 95 घायल हुए। जांच में मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई, जिसके बाद महाराष्ट्र ATS ने उन्हें 23 अक्टूबर 2008 को गिरफ्तार किया। ATS ने दावा किया कि यह हमला 'हिंदू चरमपंथियों' ने सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए किया। साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत 11 लोगों पर UAPA, MCOCA, और IPC की धाराओं में केस दर्ज हुआ।
साध्वी प्रज्ञा की जेल यातनाएं: रूह कंपा देने वाली कहानी
2018 में साध्वी प्रज्ञा ने अपनी जेल यात्रा के भयावह अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर हर कोई सन्न रह गया। इंडिया टीवी के आप की अदालत में रजत शर्मा के सामने साध्वी ने रुंधे गले से बताया:-
- अंधेरे कमरे में 13 दिन की कैद: 'मुझे ATS ने 13 दिन तक एक छोटे, अंधेरे कमरे में बंद रखा। पहले दिन से ही बेल्ट से पिटाई शुरू हुई। मेरे हाथ-पैर नीले-काले पड़ गए। मैं एक गिलास पानी भी नहीं पकड़ पाती थी।'
- नंगा कर लटकाने की धमकी: 'जेल अधिकारी मुझे गालियां देते थे। उन्होंने मुझे उल्टा लटकाने और नंगा करने की धमकी दी। यह बात कहना मेरे लिए आसान नहीं, लेकिन मैंने जो सहा, वह कोई बहन न सहे।'
- 24 दिन की लगातार यातना: 'मुझे 24 दिन तक बिना रुके पीटा गया। जब वे थक जाते, तो गालियां देते। मुझे सोने नहीं दिया जाता था, ताकि मैं मानसिक रूप से टूट जाऊं।
- गर्म पानी में नमक डालकर यातना: 'पिटाई से मेरे हाथों से खून निकलने का डर होता था, तो वे गर्म पानी में नमक डालकर मेरे हाथ डुबोते थे, ताकि फिर से पीट सकें।'
साध्वी ने दावा किया कि पूछताछकर्ता उनसे यह कबूल करवाना चाहते थे कि उन्होंने बम धमाका किया और मुसलमानों की हत्या की। उन्होंने कहा, 'वे मुझसे कहते थे कि मैं आतंकवादी हूं, RSS आतंकी संगठन है। मुझे एहसास हुआ कि हिंदुत्व को निशाना बनाया जा रहा है। वे चाहते थे कि मैं योगी आदित्यनाथ और RSS नेताओं को फंसाऊं।'
कैंसर और एनकाउंटर की साजिश?
साध्वी ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि जेल में तीन नार्को टेस्ट, तीन पॉलीग्राफ टेस्ट, और तीन ब्रेन-मैपिंग टेस्ट किए गए, जिनमें उनके शरीर में रसायन डाले गए। उन्होंने दावा किया, 'इन टेस्ट्स की वजह से मुझे ब्रेस्ट कैंसर हुआ।' साध्वी ने यह भी कहा कि ATS ने एनकाउंटर के बहाने उन्हें मारने की कोशिश की। 'मुझे लगा, अगर वे मुझे मार भी देंगे, तो भी मैं भारत माता के प्रति अपनी निष्ठा नहीं तोड़ूंगी।'
कानूनी लड़ाई और बरी होना
- 2008-2011: ATS की जांच में साध्वी को मुख्य आरोपी बनाया गया। 2009 में ATS ने 11 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, जिसमें अभिनव भारत संगठन पर साजिश का आरोप था।
- 2011: मामला NIA को सौंपा गया। NIA ने ATS की जांच में खामियां पाईं और मकोका हटाने की सिफारिश की।
- 2016: NIA ने साध्वी समेत कुछ आरोपियों को क्लीन चिट दी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर सात आरोपियों पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया।
- 2017: साध्वी को अप्रैल 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी। कर्नल पुरोहित को अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
- 2018-2024: मुकदमे में 323 गवाहों की जांच हुई, जिनमें से 34 अपने बयानों से मुकर गए। 2024 में कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भी मिली।
- 31 जुलाई 2025: विशेष NIA कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मोटरसाइकिल में बम होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
साध्वी की राजनीतिक पारी
2019 में साध्वी प्रज्ञा ने बीजेपी के टिकट पर भोपाल-सीहोर से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को हराया। उन्होंने अपनी जेल यातनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया और कहा, 'मैंने जो दर्द सहा, वह कोई बहन न सहे।' 2024 तक वह सांसद रहीं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उनकी सक्रियता कम रही।
मालेगांव विस्फोट के वक्त किसी थी भारत में सरकार? कौन था PM?
आपको बता दें कि, 22 मई 2004 से 26 मई 2014 तक डॉ. मनमोहन सिंह PM रहे और कांग्रेस‑नेतृत्व वाली सरकार का नेतृत्व किया। यह, Indian National Congress (INC) की अगुवाई वाली United Progressive Alliance (UPA) सरकार थी, जिसमें कई क्षेत्रीय दल शामिल थे। भाजपा की एकल‑दलीय (single‑party) पूर्ण बहुमत वाली सरकार पहली बार 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी, जब BJP ने लोकसभा में अकेले 282 सीटें जीती।
क्या है इस कहानी का सच?
साध्वी प्रज्ञा की यातनाओं की कहानी ने लोगों को भावुक कर दिया, लेकिन इसने कई सवाल भी खड़े किए। क्या यह एक राजनीतिक साजिश थी? क्या ATS ने जल्दबाजी में साध्वी को फंसाया? या फिर पीड़ित परिवारों को इंसाफ से वंचित रखा गया? 17 साल बाद भी यह मामला रहस्यों से भरा है।
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