लंदन की नीलामी में क्यों नहीं बिक सकी महात्मा गांधी की निशानी? खरीद के लिए उत्सुक थे लोग
Mahatma Gandhi Garland: महात्मा गांधी की एक निशानी आज भी लंदन में चर्चा का विषय बनी हुई है। 1930 के दांडी मार्च के दौरान पहनी गई गांधीजी की ऐतिहासिक माला लियोन एंड टर्नबुल की नीलामी में आकर्षण का केंद्र रही। हालांकि, हार की नीलामी नहीं हो सकी।
यह माला गांधीजी को उनकी पत्नी नंदुबेन कनुगा द्वारा भेंट की गई थी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 20-30 लाख रुपये (20,000 से 30,000 पाउंड) के बीच आंकी गई।

माला का ऐतिहासिक महत्व
- यह माला 12 मार्च 1930 को गांधीजी को उनके निजी चिकित्सक डॉ. बलवंतराय एन. कनुगा के अहमदाबाद स्थित निवास पर दी गई थी।
- माला का उपयोग गांधीजी ने उस ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह के दौरान किया था, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
- माला में गुलाबी कपड़े से बना एक आंसू के आकार का पदक है, जो चांदी और सोने के धागों और सीक्विन से सजाया गया है।
दांडी मार्च: एक ऐतिहासिक आंदोलन
- दांडी मार्च (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930), ब्रिटिश नमक कानूनों के खिलाफ गांधीजी का अहिंसक विरोध था।
- मार्च की शुरुआत साबरमती आश्रम, अहमदाबाद से हुई और लगभग 240 मील की दूरी तय करके दांडी के समुद्र तट पर समाप्त हुआ।
- 6 अप्रैल को गांधीजी ने समुद्र से नमक उठाकर ब्रिटिश कानून का उल्लंघन किया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण बनी।
माला की नीलामी और प्रतिक्रिया
- यह माला 'इस्लामिक और भारतीय कला' नामक नीलामी का हिस्सा थी।
- नीलामी घर की प्रमुख क्रिस्टीना सैने ने माला के बिक्री न होने पर आश्चर्य व्यक्त किया, लेकिन बाद में इसे लेकर कई लोगों की रुचि की पुष्टि की।
- सैने ने कहा, "हम इसे एक उपयुक्त संग्रहकर्ता को बेचना चाहते हैं। यह माला एक महान ऐतिहासिक धरोहर है।"
नीलामी में अन्य वस्तुएं
- पंजाब का भागवत पुराण चित्र: अनुमान से अधिक 27,700 पाउंड में बिका।
- राजस्थान के राजपूत घुड़सवारों के चित्र: 20,160 पाउंड में बिके।
- कालीघाट चित्रों का एक एल्बम: 21,420 पाउंड में बिका।
- भारतीय कला खंड में 90% वस्तुएं सफलतापूर्वक बिक गईं, जो भारतीय कला की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
नहीं बिक सकी गांधीजी की माला
हालांकि यह माला नीलामी में बिक नहीं पाई, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व अमूल्य है। अब यह वस्तु किसी ऐसे संग्रहकर्ता के लिए उपलब्ध है, जो इसे अपने संग्रह में शामिल करना चाहता है। यह माला न केवल गांधीजी के अद्वितीय नेतृत्व और दांडी मार्च की याद दिलाती है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है।












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