Maharashtra Election: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की सियासी लड़ाई क्यों सुपारी, गोबर-टमाटर पर आई?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के परिवार की राजनीतिक कलह अब सड़कों पर नजर आने लगी है। दोनों चचेरे भाइयों उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सीधी लड़ाई से बचते नजर आते थे। लेकिन, अब दोनों के पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

बीड में एमएनएस चीफ राज ठाकरे पर शिवसेना (यूबीटी) के लोगों की ओर से शुक्रवार को सुपारी फेंके जाने की घटना एक दिन बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे को निशाना बनाया है। ठाणे में शिवसेना (यूबीटी) सुप्रीमो के काफिले पर उनके चचेरे भाई की पार्टी के वर्करों ने गाय के गोबर, चूड़ियां, टमाटर और नारियलों से हमला किया है।

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उद्धव के काफिले पर एमएनएस कार्यकर्ताओं ने फेंके गोबर, टमाटर और चूड़ियां
शनिवार को पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने उस गडकरी रंगायतन पर प्रदर्शन शुरू किया, जहां उद्धव पार्टी के एक कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचने वाले थे और फिर जब उनका काफिला नजदीक से गुजरा तो उसपर गोबर,टमाटर और चूड़ियां फेंकनी शुरू कर दीं। उनकी दलील थी कि बीड में उद्धव की पार्टी के लोगों ने जो उनके नेता के साथ किया, वह इसका बदला ले रहे हैं।

पहले राज के काफिले पर उद्धव की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फेंकी थी सुपारी
शुक्रवार को शिवसेना (यूटीबी) के कार्यकर्ताओं ने बीड में विधानसभा चुनावों के लिए राज ठाकरे पर 'सुपारी' लेने का आरोप लगाते हुए उनके काफिले को सुपारियों से निशाना बनाया था। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि मराठा कोटा पर राज ठाकरे के स्टैंड से वे नाराज हैं।

शिवसेना (यूबीटी) नेता की सफाई, मराठा कोटा मुद्दे पर राज को बयाना निशाना
बाद में बीड के शिवसेना (यूबीटी) जिलाध्यक्ष गणेश वारेकर ने टीओआई को सफाई दी कि 'हालांकि मैं पार्टी का पदाधिकारी हूं, हमने मराठा के तौर पर प्रदर्शन किया है। राज ठाकरे को मराठा आरक्षण की हमारी मांग की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है।'

शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसी) के कार्यकर्ताओं ने किया हमला- राज ठाकरे
लेकिन, छत्रपति संभाजीनगर में राज ठाकरे ने दावा किया कि उनकी कार पर सुपारियों से हमला करने वाले शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) की पार्टी के कार्यकर्ता थे और उनका मराठा आंदोलनकारियों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया, 'उन्होंने कुछ मराठा नारे लगाए, लेकिन वे इन दलों के हैं। मैं लोगों को आगाह करना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों को समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने का मौका न दें।'

मनसे के हमले का जिक्र तक नहीं कर पाए उद्धव ठाकरे
हालांकि, जब उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने पहुंचे तो उन्होंने अपने काफिले पर हुए हमले का जिक्र तक नहीं किया। उनके हमले का पूरा फोकस मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी शिवसेना और बीजेपी रही।

राज ठाकरे पर सुपारी हमले से शिवसेना (यूबीटी) ने झाड़ा पल्ला
दरअसल, उद्धव सेना ने राज ठाकरे के काफिले पर हुए हमले से पहले ही दूरी बनाने की कोशिश शुरू कर दी थी। पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा, 'जिन लोगों ने सुपारी फेंकी वे शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारी हो सकते हैं। हालांकि, एक पार्टी के रूप में इस प्रदर्शन से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारी जानकारी के मुताबिक यह प्रदर्शन मराठा आरक्षण को लेकर था। राज ठाकरे ने आरक्षण से संबंधित एक बयान दिया था। विभिन्न दलों के युवा मराठा उनके बयान का विरोध कर रहे हैं।'

इससे पहले मराठा आरक्षण मुद्दे पर राज ठाकरे ने कहा था कि उनकी पार्टी का स्टैंड यही रहा है कि आरक्षण का आधार सिर्फ आर्थिक आधार होना चाहिए। जबकि, मराठा ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं और इसको लेकर प्रदेश की सियासत गर्माई हुई है। खासकर विधानसभा चुनावों को देखकर यह मुद्दा पर भी ज्यादा गरम है।

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अभी दो अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों की नुमाइंदगी कर रहे हैं। उद्धव विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के साथ हैं तो बीजेपी के सहयोगी होने के नाते राज ठाकरे सत्ताधारी महायुति गठबंधन से जुड़े हैं।

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