Maha Political Twist: क्या महाराष्ट्र में दोहराई जाएगी कर्नाटक की कहानी?

मुंबई। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र मामले में बड़ा फैसला सुनाया है, देवेंद्र फडणवीस की सरकार को कल यानी बुधवार शाम पांच बजे तक बहुमत साबित करना होगा, महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा, जिसका लाइव प्रसारण होगा, प्रोटेम स्पीकर ही सभी विधायकों को शपथ दिलाएंगे, जिसके बाद एक बार फिर से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है, बीजेपी-कांग्रेस-एनसीपी हर कोई अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहा है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है, ऐसे में हर किसी के मन में यही सवाल कौंध रहा है कि क्या एक बार फिर से महाराष्ट्र में कर्नाटक वाली कहानी दोहराई जाएगी क्योंकि यहां के हालात भी ठीक वैसे ही हैं, जैसे कि आज से ठीक एक साल पहले कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के थे।

एक साल पहले कर्नाटक में महाराष्ट्र जैसे हालात

एक साल पहले कर्नाटक में महाराष्ट्र जैसे हालात

गौर फरमाएं कर्नाटक में भाजपा ने मई 2018 के चुनाव के तुरंत बाद सबसे बड़ी पार्टी होने के नाम पर बीएस येदियुरप्पा को राज्यपाल वजू भाईवाला ने सीएम पद की शपथ दिला दी थी और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के नेता सुप्रीम कोर्ट चले गए और अदालत ने मुख्यमंत्री को 24 घंटे में बहुमत साबित करने को कहा, जिसमें येदियुरप्पा कामयाब नहीं रहे और उनको इस्तीफा देना पड़ा, हां ये और बात कि पूरे सवा साल के बाद वहां बीजेपी की सरकार बन गई और बीएस येदियुरप्पा सीएम बन गए।

महाराष्ट्र में भी चल रहा है सियासी ड्रामा

महाराष्ट्र में भी चल रहा है सियासी ड्रामा

ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र में भी है, विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और एनसीपी नेता अजित पवार के साथ मिलकर आधी रात को सरकार बनाने का दावा पेश किया जिसके बाद शनिवार सुबह आठ बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी लेकिन उनके शपथ लेने के बाद 48 घंटे में बहुत कुछ बदल गया है।

क्या फडणवीस बहुमत साबित कर पाएंगे?

शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी तीनों ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए, जहां से आज कोर्ट ने फैसला किया है कि कल शाम पांच बजे ही फ्लोर टेस्ट हो, इस बीच कम से कम 11 विधायकों का समर्थन देने वाले एनसीपी नेता अजित पवार के पास कुल चार-पांच विधायक बचे हैं। शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस 162 विधायक साथ में होने का दावा कर रहे हैं, ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या फडणवीस बहुमत साबित कर पाएंगे।

फडणवीस के पास हैं येदियुरप्पा से बेहतर विकल्प

फडणवीस के पास हैं येदियुरप्पा से बेहतर विकल्प

  • दरअसल येदियुरप्पा के मुकाबले फडणवीस के लिए राहत की बात यह है कि अभी स्पीकर का चुनाव भी होना है।
  • अजित पवार ने फडणवीस सरकार को समर्थन देने की जो चिट्ठी दी है वह उन्होंने एनसीपी विधायक दल के विधिवत निर्वाचित नेता के तौर पर दी है।


फिलहाल मामला काफी रोचक मोड़ पर है, देखते हैं की जीत किसकी होती है।

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