मोदी-जिनपिंग की यात्रा के समय होर्डिंग की नहीं दी अनुमति, हुई गलत रिपोर्टिंग: मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुलाकात के दौरान शहर में होर्डिंग और फ्लैक्स बोर्ड लगाने का आदेश नहीं दिया गया । कोर्ट ने कहा कि मीडिया में इस मामले पर गलत रिपोर्टिंग की गई, अदालत की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। मीडिया ने बिना पूरी बात जाने लोगों तक गलत जानकारी पहुंचाई, हमने सिर्फ नियमों का पालन करने को कहा था।

Madras High Court said we not allowed Hoarding during Modi-Jinping visit incorrect reporting

इस मामले में कोर्ट में मीडिया को चेतावनी भी दी है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, अगली बार से अगर कोई अदालत के आदेशों को गलत तरह से पेश किया तो उसके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाएगा। दरअसल, शी जिनपिंग की भारत यात्रा को दौरान पीएम मोदी ने उनका चेन्नई में स्वागत किया और तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनको पर्यटन स्थलों का दौरा भी कराया। इस दौरान चेन्नई एयरपोर्ट से लेकर महाबलीपुरम तक सड़क पर होर्डिंग और बोर्ड लगाने के अनुमति मद्रास हाई कोर्ट से मांगी गई थी। इस मामले में जस्टिस एम सत्यनारायणन और जस्टिस एन शेषासायी की बैंच के सामने सुनवाई हुई थी।

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इसी दौरान मीडिया में ऐसी खबरें आई को मद्रास हाईकोर्ट ने सड़कों पर होर्डिंग लगाने की अनुमती दे दी है। खबरों में था कि होर्डिंग पर प्रतिबंध राजनीतिक पार्टियों के लिए हैं, सरकारी कार्यक्रमों के लिए नहीं। डीएमके ने सरकार की ओर से दायर की गई याचिका का विरोध किया और आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें सरकार का अपना एजेंडा छिपा है इसलिए वह होर्डिंग लगाने की अनुमति मांगी है। इस मामले में नगर निगम की ओर से भी बयान आया कि वह शहर में होर्डिंग या फ्लेक्स लगाने की अनुमति नहीं दे सकती है।

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