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Madras HC Human Sacrifice पर बोला- 21वीं सदी में निराशाजनक प्रचलन, महिला का आरोप- सौतेली मां बलि देना चाहती है

मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा, यह देखना निराशाजनक है कि 21वीं सदी में भी मानव बलि की प्रथा प्रचलन में है।

Madras HC Human Sacrifice

Madras HC Human Sacrifice: देश भले ही मिशन मंगल और नारीशक्ति को बराबरी का हक देने के दावे करता हो, लेकिन 21वीं सदी में भी नर बलि जैसी कुप्रथाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। मानव बलि जैसी घटनाओं को अगर तथाकथित विकसित समाज के माथे पर कलंक कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। न्याय के मंदिर में बैठे न्यायमूर्ति भी ऐसी रिपोर्ट सुनकर स्तब्ध रह जाते हैं। दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जी चंद्रशेखरन मध्य प्रदेश की एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। महिला ने पर्याप्त पुलिस सुरक्षा और जान को खतरा बताते हुए मदद की गुहार लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने पहुंची। इस पर कोर्ट ने कहा- 21वीं सदी में भी मानव बलि जैसी प्रथा की प्रैक्टिस निराशाजनक है।

कथित मानव बलि की प्रथा के खिलाफ लोहा लेने वाली इस महिला के मुकदमे पर लाइव लॉ की रिपोर्ट में कहा गया, याचिकाकर्ता महिला ने दावा किया है कि उसकी सौतेली मां सहित उसके परिवार के सदस्य उसका मानव बलिदान करने की कोशिश कर रहे हैं। कथित योजनाओं के बारे में पता चलने के बाद, वह घर छोड़कर तमिलनाडु भाग गई।

महिला ने हाईकोर्ट से यह भी कहा है कि उसके माता-पिता प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जान बचाने की जुगत में घर छोड़कर भागी पीड़िता का दावा है कि उसके परिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा का भी समर्थन प्राप्त है। बता दें कि बीजेपी मध्य प्रदेश के साथ-साथ केंद्र में भी सत्तारूढ़ है। महिला ने आरोप लगाया कि उसके परिवार ने पहले ही उसके भाई और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों का मानव बलिदान कर दिया है।

याचिका में दावा किया गया है कि महिला अपने दोस्त की मदद से तमिलनाडु भाग गई थी। अब लड़की के परिवार के राजनीतिक प्रभाव के कारण भोपाल पुलिस ने उसे अवैध हिरासत में ले लिया है। महिला ने अदालत को बताया कि उसके दोस्तों को माता-पिता लगातार धमकी दे रहे हैं। उसे कहां रखा गया है? इस बारे में लोकेशन की पूरी जानकारी नहीं।

मद्रास हाईकोर्ट में दायर याचिका में मध्य प्रदेश की महिला ने अदालत से यह भी कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस, उसके माता-पिता के प्रभाव में, चेन्नई में है। महिला का कहना है कि पुलिस उसे "सुरक्षित" करने की कोशिश कर रही है।

रुह कंपाने वाली इस घटना के बारे में वरिष्ठ वकील और राज्य लोक अभियोजक हसन मोहम्मद जिन्ना ने अदालत को सूचित किया कि सरकार पीड़ित महिला को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को तैयार है।

महिला की पीटिशन पर विचार करते हुए, अदालत ने महिला के माता-पिता को तीन सप्ताह के भीतर नोटिस देने का आदेश दिया। इस बीच, अदालत ने तमिलनाडु पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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