MP Budget: शिवराज सरकार का अंतिम बजट, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, किसान पर रहेगी नजर
भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार आज अपने कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करेगीष माना जा रहा है कि चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बार का बजट मुख्य रूप से किसानों, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि पर केंद्रित रहेगा। शिवराज सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वास्थ्य योजना आयुष्मान योजना का लाभ हर किसी तक पहुंचाने की कोशिश करेगी। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में सरकार अस्पताल खोलने पर भी ध्यान देगी।

अस्पतालों को सब्सिडी
ग्रामीण इलाकों में अस्पताल खोने वालों को 40-50 फीसदी की सब्सिडी देने की शिवराज सिंह तैयारी कर रही है, मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत तकरीबन 75 लाख लोग को कवर किया जाएगा। साथ ही शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए चुने हुए स्कूलों और कॉलेजों में सैटेलाइट के जरिए पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। वहीं बेरोजगारी जैसी समस्या का आगामी चुनाव में शिवराज सिंह सरकार को नुकसान नहीं उठाना पड़े इसके लिए तमाम विभाग में खाली पड़े पदों को भी भरने का निर्देश दे दिया गया है।

आज आएंगे उपचुनाव के नतीजे
शिवराज सरकार का अंतिम बजट वित्त मंत्री जयंत मलैया आज सुबह 11 बजे सदन में पेश करेंगे। एक तरफ जहां सदन में प्रदेश का बजट पेश होगा तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की दो सीटों कोलारस और मुंगावली के उपचुनावों के भी नतीजे आएंगे। ऐसे में शिवराज सरकार की की यह अग्निपरीक्षा है कि क्या लोगों का भरोसा अभी भी भाजपा सरकार में बरकरार है। आपको बता दें कि मुंगावली में कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह और भाजपा की बाई साहेब के बीच मुकाबला है, जबकि कोलारस में कांग्रेस के महेंद्र सिंह और भाजपा के देवेंद्र जैन के बीच कांटे की टक्कर है। दोनों ही सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन यहां के विधायकों के निधन होने के बाद उपचुनाव कराया गया था।

कई पद खाली
मौजूदा समय में सरकार के तमाम विभागों में प्रथम श्रेणी से लकर चतुर्थ श्रेणी तक के तकरीबन डेढ़ लाख पद खाली है। इसमे अनुसूचित जाति के 27870 व अनुसूचित जनजाति के तकरीबन 75 हजार पद खाली है। इन सभी विभागों में तकरीबन 15 वर्षों से भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में साफ है कि चुनावी साल में भाजपा सरकार इन भर्तियों का दरवाजा खोलकर इसका पूरा लाभ लेना चाहती है। वहीं प्रदेश के कुल 17874 प्राथमिक और माध्यमकि स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं। राज्य में तकरीबन 1.23 लाख स्कूल हैं जिसमे 50 हजार से भी ज्यादा पद खाली पड़े हैं।












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