Madhavi Latha पर बीजेपी ने हैदराबाद में क्यों खेला दांव, कहीं घर में न घिर जाएं ओवैसी
हैदराबाद लोकसभा सीट पर पिछले चार चुनावों से एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी लगातार और लगभग एकतरफा जीतते आ रहे हैं। लेकिन, बीजेपी ने इस बार उन्हें घर में ही घेरने का दांव चला है।
कोमपेल्ला माधवी लता, हैदराबाद में सिर्फ मजबूत हिंदुत्व का चेहरा ही नहीं हैं। पुराने हैदराबाद की मुस्लिम महिलाओं में भी वह अपना अलग रसूख रखती हैं। उनके लिए काम किया है। उनके लिए संघर्ष कर रही हैं। उनके जीवन-स्तर में सुधार की सोच रखती हैं और उसके लिए लगातार कोशिशर करती आ रही हैं।

बीजेपी ने हैदराबाद में खेला बड़ा दांव
भारतीय जनता पार्टी के डॉ भगवंत राव ने पिछले दो लोकसभा चुनावों से ओवैसी को हैदराबाद में चुनौती देने की भरपूर कोशिश की और बाकियों के मुकाबले आगे भी रहे। लेकिन, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन के प्रमुख ने फिर भी आसानी से बाजी मार ली।
लेकिन, ओवैसी के लिए माधवी लता से मुकाबला करना उतना ही आसान होगा, यह बहुत बड़ा सवाल है। 49 वर्षीय इस कारोबारी महिला का नाम पार्टी ने भले अभी घोषित किया है, लेकिन उन्हें शायद पहले से भरोसा मिला हुआ था कि वह हैदराबाद से अबकी बार बीजेपी की उम्मीदवार बन सकती हैं।
तीन तलाक के खिलाफ अभियान की रह चुकी हैं अगुवा
सूत्रों का कहना है कि वह पिछले करीब 6 महिनों से हैदराबाद में राजनीतिक रूप से सक्रिय थीं और जमीन पर अपना आधार मजबूत करने में लगी थीं।
चुनाव में भले ही वह अब जाकर ओवैसी का सामना करने वाली हैं, लेकिन तीन तलाक के खिलाफ सफल अभियान चलाकर वह हैदराबाद के सांसद को पहले पटखनी दे चुकी हैं।
क्योंकि, ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून पास हो चुका है, जिसे असंवैधानिक कह देने से ज्यादा ओवैसी के पास अब कुछ बचा नहीं है। विरिंची हॉस्पिटल की चेयरपर्सन माधवी लता तीन तलाक के खिलाफ अपने अभियान में कई मुस्लिम महिला समूहों की अगुवाई कर चुकी हैं।
तीन तलाक के खिलाफ अपने अभियान में माधवी इतनी आगे थीं कि उन्हें पुराने हैदराबाद में मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाले इस अन्याय पर बोलने के लिए अक्सर आमंत्रित किया जाता था।
बेसहारा मुस्लिम महिलाओं की रही हैं सहारा
माधवी सिर्फ मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं को लेकर आवाज ही नहीं उठाती रही हैं। बल्कि, बेसहारा मुस्लिम महिलाओं के लिए फंड का इंतजाम करने के लिए भी जानी जाती हैं।
कहीं घर में न घिर जाएं ओवैसी
हैदराबाद लोकसभा सीट में करीब 59% मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। उनकी आधी आबादी में अपनी मौजूदगी और लोकप्रियता की वजह से माधवी लता, ओवैसी को टक्कर देने वाले पिछले उम्मीदवारों से काफी अलग हो जाती हैं।
हिंदुत्व और बेसहारा मुस्लिमों की जुगलबंदी
जहां मुस्लिम महिलाओं की परेशानियों के खिलाफ माधवी आज एक दमदार आवाज हैं, तो हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के मामले में वह हैदराबाद की दूसरी 'राजा सिंह' हैं।
उनकी तरह ये गौशाला भी चलाती हैं और विभिन्न सामाजिक संगठनों और कल्याणकारी संस्थाओं से भी जुड़ी हैं और एक समाजसेवी के तौर पर अपनी विशेष प्रतिष्ठा रखती हैं।
तेलंगाना, खासकर हैदराबाद में भाजपा का बढ़ रहा है प्रभाव
तेलंगाना में पिछले एक दशक में बीजेपी का वोट शेयर दोगुना से भी ज्यादा हो चुका है। 2014 में पार्टी को यहां सिर्फ 7% वोट मिले थे तो 2023 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में यह बढ़कर करीब 15% तक पहुंच चुका है। हैदराबाद नगर निगम चुनाव में पार्टी विरोधियों के पसीने छुड़ा चुकी है।
राज्य में बीजेपी को न सिर्फ पहली बार विधानसभा की 8 सीटें भी मिली हैं, बल्कि हैदराबाद के आसपास की कई सीटों पर यह मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी है, जिसमें चारमीनार, करवान, एलबी नगर,राजेंद्र नगर, अंबरपेट,कुथबुल्लापुर और संतनगर क्षेत्र शामिल हैं। जबकि, गोशामहल में तो टी राजा सिंह का जलवा बरकरार है ही।












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