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राहुल गांधी की बढ़ी मुश्किल, कोर्ट ने जारी किया समन, कहा- 10 जनवरी को हों पेश, आखिर क्या है पूरा मामला?

Rahul Gandhi News: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। लखनऊ की एक अदालत ने राहुल गांधी को नवंबर 2022 में महाराष्ट्र के अकोला में अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान विनायक दामोदर सावरकर के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणी से संबंधित मानहानि के एक मामले में तलब किया है।

लखनऊ कोर्ट ने राहुल गांधी को 10 जनवरी 2025 को पेश होने को कहा है। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से संबंधित मामले में लखनऊ की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शुक्रवार 13 दिसंबर को राहुल गांधी को 10 जनवरी 2025 को तलब किया है।

Rahul Gandhi News

अदालत ने पाया कि राहुल गांधी के भाषण और बांटे गए पर्चे, जिसमें उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वीर सावरकर अंग्रेजों के सेवक थे और उनसे पेंशन लेते थे, समाज में नफरत और दुर्भावना फैलाते हैं। राहुल गांधी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत आरोप हैं।

राहुल गांधी के खिलाफ याचिका में क्या कहा गया है?

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे द्वारा दायर एक शिकायत पर यह आदेश जारी किया, जिसमें राहुल गांधी पर 17 नवंबर, 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में एक संवाददाता सम्मेलन में वीर सावरकर के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था।

अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने नफरत फैलाने की नीयत से वीर सावरकर को ब्रिटिश सेवक और पेंशन लाभार्थी कहा था। याचिका में कहा गया है कि, "राष्ट्रवादी विचारधारा के महान नेता दामोदर आजादी के इतिहास में एक निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारत माता को उनकी गुलामी से मुक्त कराने के लिए अंग्रेजों के अमानवीय अत्याचारों को सहन किया और राहुल गांधी ने सावरकर जी के प्रति हीन भावना फैलाने के लिए अभद्र शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया और घृणास्पद बातें कहीं।"

अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया कि, "राहुल गांधी ने समाज में वैमनस्य और नफरत फैलाने के इरादे से यह बयान दिया था।" अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने कहा, "इसके साथ ही, प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल पत्रकारों के बीच पहले से तैयार प्रेस नोट भी बांटे गए। इससे साबित होता है कि वीर सावरकर को बदनाम करना एक सुनियोजित कृत्य था।'''

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