Vikram Batra :'मंदिर में लिए थे अधूरे फेरे, खून से भरी थी मांग', रूला देगी विक्रम-डिंपल की प्रेम कहानी
Vikram Batra-Dimple Cheema Love Story: 'जीते जी तो सब मोहब्बत करते हैं कभी किसी की रूह को चाहकर देखो तो बात बने' किसी शायर की लिखी ये लाइनें कारगिल हीरो विक्रम बत्रा और उनकी प्रेमिका डिंपल चीमा पर पूरी तरह से फिट बैठती है। दोनों का प्रेम उतना ही पवित्र है जितनी की दुआ और उनके प्यार की मजबूती का अंदाजा तो अब पूरी कायनात को है, जो दोनों को अलग करके भी जुदा नहीं कर पाई।

विक्रम बत्रा का जिक्र तब तक अधूरा है, जब तक डिंपल चीमा की बात ना की जाए।आपको बता दें कि डिंपल और विक्रम ने साथ में मात्र चालीस दिन साथ बिताए थे और उन चालीस दिनों के सहारे डिंपल ने अपनी पूरी दुनिया विक्रम बत्रा के नाम कर दी। ये दोनों किसी उपन्यास के किरदार नहीं बल्कि असल जिंदगी के दो इंसान हैं, जिन्होंने प्रेम की ऐसी दास्तां लोगों के सामने पेश की है, जो अतुलनीय है।
पढ़ाई के दौरान हुई थी विक्रम और डिंपल की मुलाकात
आपको बता दें कि विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की पहली मुलाकात पंजाब यूनिवर्सिटी के कॉलेज 1995 में हुई थी और दोनों पहली ही नजर में एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे। दोनों में दोस्ती हुई और फिर दोनों को ही लगा कि दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। दोनों ने जीवन को साथ बिताने के सुनहरे सपने देखे थे।
चार साल में केवल चालीस दिनों का साथ
विक्रम को डिंपल की सादगी, सच्चाई और सुंदरता ने प्रभावित किया था तो वहीं डिंपल उनकी बहादुरी, ईमानदारी और देश के लिए कुछ कर गुजरने की वाली इच्छा पर दिल हार बैठी थीं। दोनों ने साथ में जितना वक्त बिताया, वो काफी खूबसूरत है।
'क्यों Beautiful, मुझे ही याद कर रही थी ना'
अपने कई इंटरव्यू में डिंपल ने बताया है कि 'विक्रम के लिए वतन ही उसका पहला प्यार था। विक्रम रोज शाम 7 बजे मुझे फोन किया करता था। मुझे आज भी लगता है कि जैसे कि उसका फोन आएगा और जैसे ही मैं फोन उठाऊंगी वो दूसरी ओर से बोलेगा- 'क्यों Beautiful, मुझे ही याद कर रही थी ना।'
'हमारे फेरे तो हो गए मिसेज बत्रा, मुबारक हो'
डिंपल ने बताया था कि 'वो दोनों अक्सर मंसा देवी के मंदिर जाया करते थे, एक दिन हम दोनों मंदिर की परिक्रमा कर रहे थे, वो मेरे पीछे था, उसने मेरी चुन्नी पकड़ी हुई थी लेकिन मुझे ये पता नहीं था। चार परिक्रमा के बाद जब मैंने आंखें खोली तो उसने मुझे कहा 'हमारे फेरे तो हो गए मिसेज बत्रा, मुबारक हो।'
'ब्लेड से हाथ काटकर खून से मेरी मांग भरी थी'
डिंपल ने कहा कि 'एक दिन जब मैंने उससे बोला था कि अब घर वाले मेरे ऊपर शादी का दवाब बना रहे हैं तो उसने वहीं पर ब्लेड से हाथ काटकर खून से मेरी मांग भर दी थी और कहा था कि अब तुम्हें मुझसे कोई अलग नहीं कर सकता है।'
बत्रा की यादों के साथ ही रहने का वादा किया
विक्रम ने डिंपल से वादा किया था कि' कारगिल मिशन से लौटने के बाद उनसे शादी करेंगे लेकिन वो जब लौटे तो तिरंगे में थे। इसके बाद डिंपल ने फैसला किया कि वो कभी शादी नहीं करेंगी।'
बत्रा के परिवारवालों के काफी करीब
उन पर घरवालों ने काफी प्रेशर भी बनाया लेकिन डिंपल ने बत्रा की यादों के साथ ही रहना पसंद किया। वो एक स्कूल में शिक्षिका हैं और आज भी विक्रम बत्रा के परिवारवालों के काफी करीब हैं, वो उन्हें अपनी बेटी मानते हैं।












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