Lok sabha security Breach: सागर शर्मा के घर मिली डायरी से खुले कई गहरे रहस्य, जानें कब से कर रहा था प्लानिंग?
Lok sabha security Breach, संसद की सुरक्षा में सेंध लगानें वाले सभी आरोपियों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस मामले की पड़ताल में जुटी हुई हैं। संसद के अंदर कूदने वालों में से एक सागर शर्मा को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है।
पुलिस के हाथ लखनऊ के सागर शर्मा की डायरी लगी है। जिसमें कई खुलासे हुए हैं। सागर शर्मा की डायरी के पन्नों में ऐसे कई नोट्स, देशभक्ति कविताएं और क्रांति की बात करते नजर आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सागर ने 2015 में 12वीं पास करने के बाद डायरी लिखना शुरू किया था। डायरी का पहला पन्ना उसने 8 जून, 2015 को लिखा था। सागर ने डायरी में लिखा, 'मैं केवल अपने देश के लिए और इसकी पूर्ण स्वतंत्रता के लिए काम करता हूं। बलात्कार, भ्रष्टाचार, भूख, हत्या, अपहरण, तस्करी, धर्म के लिए लड़ाई जैसी चीजें देश के हित के खिलाफ हैं।
सागर ने आगे लिखा कि, मैं अमीर नहीं हूं, मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं। मुझे कुछ ऐसे दोस्तों की जरूरत है जो देश के लिए काम करने के प्रति ईमानदार हों।' डायरी के एक पेज पर उसने राम प्रसाद बिस्मिल के महाकाव्य "सरफरोशी की तमन्ना" की कुछ पंक्तियां भी लिखी हैं। 'हौसले जो होते हैं बुलंद, वो झुकते नहीं ललकार से/सर जो उठ जाते हैं, वो काटते नहीं तलवार से।'
सागर शर्मा ने लिखा आज लगभग पांच वर्षों बाद मैंने लिखना शुरू किया है। इन पांच वर्षों का अपना व्यक्तिगत अनुभव इस डायरी में लिखने की जरूरत महसूस हुई। अब आगे भी लिखने की मानसिक स्तिथि बनेगी या नहीं यह स्पष्ट नहीं कह सकता पर सच कहूं तो मैं बहुच इच्छुक भी हूं अपनी मानसिकता, दृष्टिकोण और उद्देश्य को लेखन के जरिए पाठकों से साक्षात्कार करा सकूं तथा अपने समाज के वर्तमान को आपके लिए पारदर्शी बना सकूं। ब्रह्मंड की शुरुआत से धरती पर इंसानों के मानसिक समाजिकरण तक वास्तविकता की व्याख्या करना जरूरी है।
सागर की डायरी के पेज पर लिखा है 'घर से विदा लेने का समय नज़दीक आ गया है। एक तरफ डर भी है और दूसरी तरफ कुछ भी कर गुजरने की आग में दहक रही है, काश में अपनी स्थिति माता-पिता को समझा सकता। मगर ऐसा नहीं है कि मेरे लिए संघर्ष की राह चुनना आसान नहीं रहा, हर पल उम्मीद लगाई। पांच साल मैंने प्रतीक्षा की कि एक दिन आएगा जब मैं अपने कर्तव्य की और बढ़ूंगा। दुनिया में ताकतवर व्यक्ति वह नहीं जो छीनना जानते हैं। ताकतवर वो है जो हर सुख त्यागने की क्षमता रखता है।'
सागर ने डायरी के एक पन्ने पर लिखा कि, उबला फिर आज लहू रंगो का हर शख्स में, जागा जज्वा कुर्बानी का मौत के आगोश में, दिल में है चिंगारी कुछ ऐसी, हमको न चैन है न अब होश...। अब इंकलाब ने ली अंगड़ाई फिर इस वतन में यारों, हक न लूटे जाएंगे अब गरीब के और किसानों के....। दर्द अपने वतन का मुझसे देखा जाता नहीं, दुश्मन के आगे झुकना मैं किसी को सिखाता नहीं। जिस कमरे में यह डायरी मिली, उसमें शहीद भगत सिंह की कई फोटो लगी हुई हैं।
सागर की डायरी में कुछ अजीब नामों के साथ करीब 30 मोबाइल नंबर मिले हैं, जिनमें से अधिकांश अब चालू नहीं हैं। कुछ नंबरों को डायल किया गया तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।सागर की किताबों के कलेक्शन में शेरलॉक होम्स की जासूसी से जुड़ी किताबें और एडॉल्फ हिटलर की 'मीन काम्फ' हिंदी अनुवाद बुक मिली है।
सागर के परिवार के लोगों का कहना है कि, सागर ने जब सीनियर सेकेंडरी का एग्जाम पास किया तभी से उसने इसे लिखना शुरू किया। जनवरी 2021 में वह बेंगलुरु में रहने वाले अपने दोस्त से मिलने गया था। वहां से लौटने के बाद उसने फिर से ऐसे नोट लिखे।












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