EVM-VVPAT मामला: 21 विपक्षी दलों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका दायर कर 21 राजनीतिक दलों ने मांग की थी कि, ईवीएम और वीवीपैट मशीन की 50 फीसदी पर्चियों का मिलान किया जाए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 21 दलों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वीवीपैट के ईवीएम से मिलान को लेकर 24 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

Lok sabha elections 2019: Supreme Court twenty-one Opposition parties EVM-VVPAT verification

लोकसभा चुनाव में 5 चरण की वोटिंग हो चुकी है। विपक्षी दल लगातार ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में विपक्षी दलों ने कोर्ट से चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की थी कि ईसी 50 फीसदी वीवीपैट का ईवीएम से मिलान करे। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान के संबंध में दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।

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सीजेआई रंजन गोगोई ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट इस मामले को बार-बार क्यों सुनें। सीजेआई ने कहा कि वह इस मामले में दखल देना नहीं चाहते हैं। दरअसल, विपक्षी दलों की याचिका में कहा गया था कि ऐसे कई मामले आए हैं जिसमें वोटर किसी अन्य पार्टी को वोट देता है और उसका वोट किसी अन्य को चला जाता है। यह पहली बार नहीं है जब पार्टियों की ओर से 50 फीसदी वीवीपैट के ईवीएम से मिलान की याचिका दायर की गई हो।

21 विपक्षी दलों ने दायर की थी याचिका

इसके पहले, 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि हर विधानसभा में एक की बजाए पांच बूथों पर ईवीएम-वीवीपीएटी पर्चियों का औचक मिलान होगा। सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश पर पार्टियों ने यह रिव्यू पिटिशन दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग को 20625 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियां गिननी हैं, यानी हर विधानसभा क्षेत्र में 5 ईवीएम की जांच की जाएगी। जबकि 21 दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपीएटी पेपर स्लिप के मिलान की मांग की थी।

ईवीएम को लेकर पहले भी विपक्षी दलों ने जताई है आपत्ति

दरअसल, मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें भी आई हैं और कई जगह ऐसे आरोप लगे हैं कि ईवीएम का बटन दबाने पर किसी अन्य पार्टी को वोट चला जाता है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि जहां ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं, वहां पर दूसरी मशीनों का इस्तेमाल किया गया है।सुप्रीम कोर्ट में ये पुनर्विचार याचिका आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू, एनसीपी नेता शरद पवार, एनसी नेता फारूक अब्दुल्ला, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव (सपा) सहित 21 राजनीतिक दलों ने दायर की थी।

इस मामले में पहले भी चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और उनमें गड़बड़ी भी पैदा होती है। इसके अलावा इनकी प्रोग्रामिंग भी की जा सकती है। उन्होंने ये जानने की मांग की कि नए वीवीपैट में वोटर स्लिप सिर्फ तीन सेकेंड तक कैसे दिखाई देता है, जबकि इसे 7 सेकेंड तक दिखाई देना चाहिए। उन्होंने ईवीएम मामले पर बीजेपी पर भी निशाना साधा था।

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