Lok Sabha Elections 2019: आंगन में तुलसी, ड्रॉइंग रूम में मोदी, रामपुर में आजम के खिलाफ खड़ा इकलौता मुसलमान

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के रामपुर में हजरत हाफिज सैय्यद जमाल्लुलाह की दरगाह के करीब एक मोहल्ला है-रौशनबाग, उस मोहल्ले के तंग गलियों से गुजरते हुए जब फरहत अली खां के घर पहुंचेंगे तो दरवाजे पर लगा, भाजपा के झंडे के रंगों का साइनबोर्ड, जिस पर उनकी बीवी मारिया फरहत और उनकी डिग्री का जिक्र है, ये बताने के लिए काफी होगा कि आप किसी बीजेपी कार्यकर्ता के घर आ गए हैं, रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां की लोकप्रियता का कोई सानी नहीं हैं।

रामपुर में आजम के ख़िलाफ़ खड़ा इकलौता मुसलमान

रामपुर में आजम के ख़िलाफ़ खड़ा इकलौता मुसलमान

शहर में विकास के जितने भी पत्थर हैं, उन पर आजम खां का ही नाम खुदा है, लोकसभा चुनाव में वो रामपुर से समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट हैं और शहर में जिससे भी बात करिए वो उनके विकास के ही कसीदे गढ़ता है, आजम खां की हैसियत शहर में बेताज बादशाह जैसी है, उस शहर में फ़रहत खां ने 20 सालों से भाजपा का झंडा उठा रखा है, ऐसा क्यों है, यही जानने मैं उनके घर पहुंचा।

फरहत अली खां से मुलाकात

फरहत अली खां से मुलाकात

फरहत अली खां के ड्राइंग रूम में नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी है, जिस पर संदेश लिखा है- मिशन मोदी, अगेन फॉर पीएम, आंगन में उन्होंने तुलसी का पौधा भी लगा रखा है, मुझे उन्होंने ये पौधा गुजारिश करके दिखाया. तुलसी के पौधे के चिकित्सकीय गुणों की भी उनको अच्छी-ख़ासी जानकारी है।

हॉकी के कोच हैं

फरहत खां हॉकी के कोच हैं, 1998 में छात्र राजनीति के दिनों में बीजेपी से जुड़े थे, बीजेपी से जुड़ने को उनका किस्सा भी दिलचस्प है, उन्होंने बताया कि अपने कॉलेज़ के दिनों में वो आज़म खां से जुड़े थे, मगर उन्हीं दिनों बाबरी मस्ज़िद गिरा दी गई, उन्हें बहुत दुख हुआ, उनका कहना है कि बाबरी मस्ज़िद ढहने के बाद उन्हें लगा कि बीजेपी से दूरी बढ़ाने के बजाय अगर वो उस पार्टी से जुड़ें तो शायद उसकी मुसलमानों के खिलाफ नाराजगी कम होगी।

सिकंदर बख्त का हुआ जिक्र

सिकंदर बख्त का हुआ जिक्र

फरहत अली खां ने बताया कि 1998 में सिकंदर बख्त ने रामपुर का दौरा किया था, उन्हीं दिनों उन्होंने बीजेपी का हाथा थामा, उल्लेखनीय है कि 2000 से पहले तक सिकंदर बख्त भाजपा की सियासत के राष्ट्रीय स्तर पर इकलौते मुस्लिम चेहरे थे, फरहत ने बताया कि सिंकदर बख्त खुद हॉकी के प्लेयर थे, इसलिए वो उनसे आसानी से मिल पाते थे। फरहत खां का कहना है कि बीजेपी ज्वाइन करने के बाद रामपुर शहर में उनकी मुश्किलें बढ़ गईं, उन्हें सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा हालांकि 1998 में जब मुख्त़ार अब्बास नकवी रामपुर से सांसद चुने गए तो उनकी जिंदगी आसान हुई, उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होने का मौका मिला और उन्होंने और भी लोगों को भाजपा से जोड़ा।

 मुसलमानों के 'ॐ' बोलने की वक़ालत की थी

मुसलमानों के 'ॐ' बोलने की वक़ालत की थी

फरहत खां का आरोप है कि रामपुर में भाजपा की सियासत करने की वजह से उन्हें आजम खां की नाराज़गी का सामना भी करना पड़ा, वो कांट्रेक्ट पर हॉकी के कोच थे, सूबे में जब-जब सपा की सरकार बनी, उनका कॉट्रेक्ट खत्म कर दिया गया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने मुसलमानों के 'ॐ' बोलने की वक़ालत की थी, जिस पर उनके खिलाफ फ़तवा जारी कर दिया गया, फरहत खां ने रामपुर में बाबा रामदेव का भी स्वागत किया था, उन्हें रामपुरी टोपी पहनाई और मसि-उल-आलम का ख़िताब दिया था, जिसके बाद भी उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया।

फरहत खां की पत्नी भाजपा जिला महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं

इन दिनों फ़रहत खां की पत्नी मारिया फरहत भाजपा जिला महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं और पार्षद की चुनाव लड़ चुकी हैं, भाजपा में मुसलमानों की बात उठाने के लिए फ़रहत खां अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ का गठन कर चुके हैं, फरहत खां भाजपा के अनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच के सदस्य भी है।

(अवनीश पाठक पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं, इन दिनों वो उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनावी दौरे पर हैं)

पढ़ें: लोकसभा चुनाव 2019 का विशेष कवरेज

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