Thiruvananthapuram: शशि थरूर के लिए क्यों आसान नहीं है ये चुनाव, राजीव चंद्रशेखर की एंट्री से बदला सीन
Lok Sabha Election News: केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। सोमवार को वह केरल की राजधानी में बाइक रैली करते नजर आए थे।
राजीव चंद्रशेखर की एंट्री से तिरुवनंतपुरम सीट पर होने वाला त्रिकोणीय मुकाबला और हाई-प्रोफाइल हो गया है। वहां उनके मुकाबले तीन बार के कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर होंगे, यह लगभग तय है। वहीं सत्ताधारी एलडीएफ से इस सीट पर सीपीआई के पन्न्यन रवींद्रन प्रत्याशी बनाए गए हैं।

तिरुवनंतपुरम सीट पर भाजपा बना चुकी है अपना जनाधार
थरूर इस सीट पर 2009 से लगातार जीतते आ रहे हैं। पिछली बार उन्हें यहां 41.15% वोट मिले थे। जबकि, दूसरे स्थान पर भाजपा के कुम्मनम राजशेखरन रहे थे, जिन्हें 31.26% वोट आया था। तीसरे स्थान पर सीपीआई उम्मीदवार को 25.57% वोट हासिल हुआ था। रवींद्रन आखिरी बार 2004 में यहां पर जीते थे।
केरल जैसे भाजपा के लिए सूखाग्रस्त राज्य में पार्टी उम्मीदवार को मिले वोट से जाहिर है कि केरल की अन्य 19 सीटों के मुकाबले यहां भाजपा का पहले से ही मजबूत जनाधार है, जहां सत्ताधारी गठबंधन भी उसे पीछे छूट चुका है।
तिरुवनंतपुरम जिले की विधानसभा से ही भाजपा जीती है एकमात्र चुनाव
केरल में बीजेपी लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। जबकि, विधानसभा चुनाव में उसे 2016 में एकमात्र सफलता हाथ लगी थी, जब पार्टी के ओ राजगोपाल नेमोम सीट से चुनाव जीते थे। यह विधानसभा सीट भी तिरुवनंतपुरम जिले का ही हिस्सा है।
अपने-अपने क्षेत्र के धुरंधर हैं चंद्रशेखर और थरूर
78 साल के सीपीआई उम्मीदवार केरल में पार्टी के किसी भी आम उम्मीदवार की तरह ही हैं। लेकिन, 59 वर्षीय भाजपा उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर और 67 वर्षीय थरूर अपने-अपने क्षेत्र के माहिर खिलाड़ी हैं। दोनों अपनी स्पष्टवादिता के लिए भी जाने जाते हैं।
कई क्षेत्रों में लोहा मनवाने की वजह से ही पीएम मोदी ने बनाया मंत्री
चंद्रशेखर और थरूर दोनों में वैश्विक मुद्दों की समझदारी है और उसे सहजता के साथ सुलझाने का ये समाधान भी दे सकते हैं। राजीव चंद्रशेखकर जुलाई 2021 से मोदी सरकार में आईटी और स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय में राज्यमंत्री का काम देख रहे हैं, तो उनमें कॉर्पोरेट सेक्टर की भी भरपूर कुशलता है।
चंद्रशेखर सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की फील्ड से जुड़े एक टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर भी रहे हैं। भाजपा को लगता है कि 84.37% साक्षरता वाले चुनाव क्षेत्र में उसके प्रत्याशी मध्यम-वर्ग की उम्मीदों पर खड़े उतर सकते हैं।
केरल में कांग्रेस के प्रमुख चेहरा हैं शशि थरूर
जबकि, थरूर कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं और खासकर केरल में उनकी अपनी एक खास पहचान बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक रह चुके थरूर भले ही अक्टूबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हार गए हों, लेकिन केरल में अभी भी वह पार्टी के प्रमुख चेहरा हैं।
हाल ही में वे इंडियन एक्सप्रेस से कह चुके हैं कि 2009 से एक सांसद के रूप में उनका जो ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, उसपर उन्हें पूरा भरोसा है और किसी भी चुनाव को न तो हल्के में लेते हैं और न ही इस बार भी लेंगे।
पीएम मोदी ने केरल में डबल डिजिट में सीट जीतने की भविष्यवाणी की है
भाजपा के लिए यहां अभी एक एडवांटेज यह दिख रहा है कि कांग्रेस और सीपीआई दोनों ही उस विपक्षी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं, जो केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ बना है। इस तरह से पार्टी खुद को राज्य में सत्ता-विरोधी वोट का हकदार भी मान रही है।
वैसे थरूर और चंद्रशेखर दोनों ही नायर हैं, जो कि ऊंची जाति है। जबकि, एलडीएफ प्रत्याशी पिछड़े वर्ग से आते हैं। चंद्रशेखर मोदी सरकार के वे चेहरे हैं, जो महत्वपूर्ण मसलों पर सरकार का पक्ष रखते नजर आते हैं और अपने काम में काफी प्रोफेशनल हैं। उनके माध्यम से पार्टी इस बार केरल में अपने लिए जगह बना लेने का सपना देख रही है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार के लोकसभा चुनाव में केरल में भाजपा को डबल-डिजिट में सीटें मिलने की भविष्यवाणी करके गए हैं।
अंतिम बार तिरुवनंतपुरम से चुनाव लड़ेंगे थरूर!
जहां तक थरूर की बात है तो भले ही कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी घोषित नहीं की है, लेकिन वह इस बार भी पार्टी के प्रत्याशी होंगे इसकी पूरी संभावना है। पिछले साल दिसंबर में थरूर ये बात जरूर कह चुके हैं कि यह तिरुवनंतपुरम से उनका आखिरी चुनाव होगा।












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