Lok Sabha Election: BJP के 70-80 एमपी हैं रडार पर, ऐसे सांसदों का कट टिकट सकता है टिकट
Lok Sabha Election 2024 News: भारतीय जनता पार्टी अपनी पहली लिस्ट कभी भी जारी कर सकती है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से गुरुवार को पार्टी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट पर मुहर लगाने वाली है, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपने मौजूदा सांसदों में से 70 से 80 का टिकट काट सकती है। इसके लिए पार्टी विभिन्न पैरामीटर पर गौर कर रही है, जिसमें एक सांसद के तौर पर उनका प्रदर्शन और आने वाले चुनाव में उनकी जीत की संभावना सबसे प्रमुख वजहें हो सकती हैं।

ऐसे सांसदों का कट टिकट सकता है टिकट
इसके अलावा कई मौजूदा सांसदों को लेकर माना जा रहा है कि उनकी ढलती उम्र उनकी उम्मीदवारी में बाधा बन सकती है। वहीं अगर कोई सांसद एक ही सीट से कई बार से जीत रहा है और उसके खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर काम करने की आशंका है तो उनका भी टिकट काटा जा सकता है।
कुछ प्रदेश इकाइयों से मिल चुके हैं नड्डा और शाह
बीजेपी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट को अंतिम रूप देने से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह की विभिन्न प्रदेश इकाइयों के नेताओं के साथ बैठकें भी हो चुकी हैं।
प्रत्येक सीट से तीन नाम सुझाए जाने की जानकारी
जिन राज्यों के नेताओं ने संभावित उम्मीदवारों के नामों के सिलसिले में शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा की है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और उत्तराखंड समेत कुछ और प्रदेशों के नेता शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इन बैठकों में प्रदेश इकाइयों ने केंद्रीय नेतृत्व को प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए तीन उम्मीदवारों के नाम सुझाए हैं।
शिवराज और सिंधिया भी हो सकते हैं उम्मीदवार
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी संभावित उम्मीदवार के तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को दिया गया है। इसी तरह से राजस्थान से पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ का नाम भी दिए जाने की चर्चा है।
ऐसे नेताओं का भी टिकट कट सकता है
भाजपा नेताओं का कहना है कि पिछले साल के अंत में हुए विधानसभा चुनावों में एमपी,राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी के जिन सांसदों को चुनाव लड़ने का मौका मिला था, उन्हें शायद ही इस बार टिकट मिले। उनमें से तो कई एमएलए बनकर संबंधित राज्यों में मंत्री भी बन चुके हैं।
अलबत्ता तेलंगाना में जिन सांसद को विधानसभा का चुनाव लड़ने को कहा गया था, उन्हें लोकसभा चुनाव में भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
160 कमजोर सीटों पर ही रहेगा फोकस
बीजेपी की पहली लिस्ट में उसकी कमजोर सीटों के प्रत्याशियों के नाम भी शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी ने 160 लोकसभा सीटों को अपने लिए कमजोर सीटों की लिस्ट में रखा है। इनमें से कुछ तो वो हैं, जहां 2019 में पार्टी जीत भी चुकी है या फिर आगे चलकर उपचुनावों में भी वो उसके पास आई हैं।
सिर्फ पीएम मोदी की लोकप्रियता और भावनात्मक मुद्दों के भरोसे नहीं है भाजपा
इस तरह से साफ है कि भारतीय जनता पार्टी 370 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य को फुलप्रूफ रखना चाहती है। मतलब, यह सिर्फ राम मंदिर और आर्टिकल 370 जैसे भावनात्मक मुद्दों के भरोसे ही नहीं है; और न ही सिर्फ पीएम मोदी की लोकप्रियता और उनके 10 साल के कार्यकाल में सरकार की सफलताओं के भरोसे है।
'फुलप्रूफ' है बीजेपी का प्लान!
पार्टी एक-एक सीट पर प्रत्येक उम्मीदवार को सभी पैरामीटर पर आंकलन करने के बाद ही उतारने की तैयारी में है। इसके लिए पार्टी पिछले कुछ समय से कई पेशेवरों की भी सहायता ले चुकी है और कई स्रोतों से प्रत्येक लोकसभा सीट का पूरा फीडबैक जुटाने की कोशिश की है।












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