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Lok sabha election 2024: इस राज्य गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं महिला वोटर्स, बीजेपी नहीं ये पार्टी पहली पसंद

Kerala Lok sabha election 2024, लोकसभा चुनावों के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिनों का समय बचा है। राजनीतिक दल लगातार मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं। मगर देश में एक राज्य ऐसा भी है, जहां महिला मतदाता चुनावों में अहम फैक्टर हैं। वह राज्य है केरल।

केरल में महिला मतदाता राज्य के कुल मतदाताओं का 51.6% हैं। राज्य में महिलाओं का ये आंकड़ा लोकसभा चुनावों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। राज्य में शहरी महिला मतदाताओं का झुकाव यूडीएफ(कांग्रेस समर्थित गठबंधन) की ओर रहा है, लेकिन 2021 विधानसभा चुनावों में महिला वोटरों ने एलडीएफ(लेफ्ट समर्थित गठबंधन) के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन यह संसदीय चुनाव है।

Lok sabha election 2024 Women voters can be a game-changer in Kerala Congress is her first choice

महिला के बदलते वोटिंग ट्रेंड को देखते हुए एक्सपर्ट ये अनुमान लगा रहे हैं कि केरल की महिला मतदाता आगामी चुनाव में निर्णायक हो सकती हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि ऊंची जाति की हिंदू महिलाओं का झुकाव एनडीए की ओर हो सकता है, जबकि अन्य हिंदू समुदायों की महिलाएं अपना वोट तीनों मोर्चों में बांट सकती हैं।

लोकनीति के चुनाव विश्लेषक का मानना है कि, महिलाओं के वोटों में विभाजन के मजबूत संकेत हैं। पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी/एनडीए का वोट शेयर 15% से 18% के बीच रहा है। यह 2011 में लगभग 12% था, जिसमें एक मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है। सीटें जीतने के लिए एनडीए को 20% से 21% वोट शेयर की आवश्यकता होगी और जिसमें महिलाएं भूमिका निभाएंगी।

केरल में यूडीएफ महिलाओं की पहली पसंद
केरल में एलडीएफ थोड़ा कमजोर है क्योंकि ये संसदीय चुनाव हैं और सीपीएम राष्ट्रीय पार्टी बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है। सीपीआई पहले ही वह दर्जा खो चुकी है। मुस्लिम महिलाओं के वोट एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटने की उम्मीद है। जहां तक हिंदू महिला मतदाताओं का सवाल है, लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है।

शहरी महिलाओं का झुकाव एनडीए की तरफ
इसके ठीक विपरीत राज्य की युवा मुस्लिम महिला मतदाता मुख्यमंत्री और एलडीएफ के मजबूत रुख से प्रभावित होकर एलडीएफ की ओर अपना झुकाव रखती हैं। जो राज्य की सत्ताधारी पार्टी के लिए एक राहत की खबर है। वहीं दूसरी ओर एनडीए ने पहली बार त्रिकोणीय मुकाबले में प्रवेश करते हुए शहरी महिलाओं और पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

सीएए और यूसीसी नहीं है केरल में चुनावी मुद्दा
जिसके चलते एक्सपर्ट्स का मानना है कि, महिलाओं के वोटों में संभावित विभाजन हो सकती है। भाजपा का लक्ष्य अधिक वोट शेयर हासिल करना है, खासकर महिलाओं के बीच। केरल में कई जगहों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। जिसमें यूडीएफ को बढ़त मिलेगी। महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा यूडीएफ और उसके बाद एलडीएफ और बीजेपी को वोट देगा। यही नहीं राज्य में सीएए और यूनिफॉर्म सिविल कोड चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है। बीजेपी की तामम कोशिशों के बाद वह इसे लोगों के बीच रखने में सफल नहीं हो पाए हैं।

2024 के चुनावों में यूडीएफ ने केवल एक महिला उम्मीदवार को नामांकित किया है, जबकि एलडीएफ ने तीन महिला उम्मीदवारों को नामांकित किया है। इसके विपरीत, एनडीए ने महिला मतदाता जनसांख्यिकी पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए चार महिलाओं को उम्मीदवारों बनाया है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि टिकट वितरण महिलाओं के मतदान रुझान पर महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाल सकता है क्योंकि प्रमुख पार्टियों के बीच विकल्प सीमित है।

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